दिल्ली की सेशंस कोर्ट ने कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस 11 सितंबर 2024 के उस आदेश के खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका पर जारी हुआ है, जिसमें मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उनके कथित तौर पर 1980-81 की मतदाता सूची में नाम दर्ज होने से जुड़ी शिकायत को खारिज कर दिया था। स्पेशल जज (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद सोनिया गांधी, दिल्ली पुलिस और राज्य सरकार से जवाब मांगना जरूरी समझा। अदालत ने ट्रायल कोर्ट रिकॉर्ड (TCR) भी तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी।
नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम का आरोप
शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी का आरोप है कि जनवरी 1980 में सोनिया गांधी का नाम नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की वोटर लिस्ट में दर्ज था, जबकि उस समय उनके पास भारतीय नागरिकता नहीं थी। शिकायत में कहा गया है कि यह कानूनी रूप से गलत था और इसके पीछे संभावित गड़बड़ी या जालसाजी हो सकती है। शिकायतकर्ता की मांग है कि पुलिस जांच कर एफआईआर दर्ज की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मतदाता सूची में नाम कैसे और किन आधारों पर जोड़ा गया।
पहले क्यों खारिज हुआ था मामला?
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने शिकायत को खारिज करते हुए कहा था कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(4) के तहत पुलिस जांच का आदेश देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। हालांकि शिकायतकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता पवन नरंग ने तर्क दिया कि पहले नागरिकता साबित होना जरूरी है, उसके बाद ही किसी क्षेत्र का निवासी और फिर मतदाता बनने का हक मिलता है। उन्होंने दावा किया कि 1982 में सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया और 1983 में नागरिकता मिलने के बाद दोबारा जोड़ा गया।
सोनिया गांधी को जन्मदिन पर नोटिस
दिलचस्प बात यह है कि कोर्ट का नोटिस आज यानी 9 दिसंबर को जारी हुआ, आज सोनिया गांधी का 79वां जन्मदिन भी है। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। अब सेशंस कोर्ट यह तय करेगा कि मजिस्ट्रेट का फैसला सही था या नहीं। यदि अदालत को शुरुआती आदेश में खामी दिखी, तो वह पुलिस जांच का निर्देश दे सकती है अन्यथा शिकायत खारिज ही रहेगी।