
Delhi Pollution: राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण (Air Pollution) के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें आंखों से संबंधित शिकायतें प्रमुख हैं। विभिन्न अस्पतालों और विशेषज्ञों की ओर से जारी आंकड़ों और चेतावनियों से यह स्पष्ट होता है कि प्रदूषित हवा का आंखों पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
एम्स के नेत्र चिकित्सा केंद्र की प्रमुख डॉ. राधिका टंडन ने बताया कि अस्पताल के ओपीडी में अब रोजाना ऐसे मरीज आ रहे हैं जिनमें आंखों में जलन, खुजली, लालिमा और अत्यधिक पानी आने जैसी समस्याएं हैं। इसी तरह, दिल्ली के अस्पतालों में पिछले दो सप्ताह में आंखों के मरीजों की संख्या में 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा ड्राई आई सिंड्रोम (सूखी आंख), एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस (आंखों की एलर्जी) और कॉर्निया क्षति के मामले सामने आए हैं।
प्रदूषित हवा का असर विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से फेफड़ों या हृदय रोग से पीड़ित लोगों पर अधिक हो रहा है। दिल्ली के करीब दस लाख लोग इस समय इन तकलीफों से गुजर रहे हैं, जिनमें दो लाख के करीब बच्चे शामिल हैं।
साइंटिफिक रिपोर्ट्स 2025 के अनुसार, पीएम 2.5 (हवा में मौजूद बेहद महीन प्रदूषक कण) में हर 1% की बढ़ोतरी से ढाई लाख से ज्यादा नए लोग आंखों की बीमारियों से प्रभावित हो रहे हैं। अध्ययन यह भी बताता है कि देश के विभिन्न प्रदूषित शहरों के 10 करोड़ से अधिक लोग ड्राई आई बीमारी से पीड़ित हैं।
एम्स के सामुदायिक नेत्र विज्ञान विभाग के प्रभारी अधिकारी प्रो. प्रवीण वशिष्ठ ने बताया कि प्रदूषित हवा दिल्ली के लोगों की आंखों की नमी छीन रही है, जिससे संक्रमण व जलन का खतरा दोगुना हो गया है। यह स्थिति रेटिना और मैक्युला की कोशिकाओं को धीरे-धीरे नष्ट कर रही है, जिससे दृष्टि स्थायी रूप से धुंधली होती जा रही है।
नवंबर 2024 में जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बेहद खराब स्तर पर था, तब भी आंखों के संक्रमण के मामले दोगुने हो गए थे। इन दिनों दिल्ली में मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) के मामलों में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है, और ग्लूकोमा का खतरा आठ प्रतिशत तक बढ़ गया है।
चिकित्सकों ने लोगों को सलाह दी है कि वे उच्च प्रदूषण वाले समय में घर के अंदर रहें, एन-95 मास्क पहनें, पर्याप्त पानी पिएं और यदि संभव हो तो एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। डॉ. टंडन और डॉ. प्रवीण वशिष्ठ ने लोगों को आगाह किया है कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे समस्या और बढ़ सकती है और आंखों पर स्थायी असर पड़ सकता है, जिससे ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
दिल्ली में वायु प्रदूषण के कई कारण हैं, जिनमें कूड़े के पहाड़ (गाजीपुर, ओखला और भलस्वा साइट पर लाखों टन कूड़ा), गाड़ियों से निकलने वाला धुआं (प्रतिदिन एक करोड़ दोपहिया वाहनों से धुआं), औद्योगिक गतिविधियां और सड़कों व फुटपाथ पर उड़ती धूल शामिल हैं। निर्माण और विध्वंस से निकलने वाला मलबा भी सड़कों के किनारे पड़ा रहता है, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने लोगों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की है। साथ ही, नागरिकों से ग्रीन दिल्ली ऐप और 311 ऐप के माध्यम से प्रदूषण से जुड़ी शिकायतें दर्ज करने की सलाह दी गई है। DPCC के सदस्य सचिव संदीप मिश्रा ने बताया कि DPCC अब जन जागरूकता वाले मैसेज भेजने के लिए प्रोफेशनल एजेंसी की सेवाएं ले रहा है और लोग अपनी शिकायत या सुझाव के साथ DPCC को टैग भी कर पाएंगे।
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