Delhi NCR Pollution Crisis: जहरीली हवा से बेहाल दिल्ली-एनसीआर, सर्वे के अनुसार 68% लोग पहुंचे डॉक्टर के पास

दिल्ली-एनसीआर में 80 प्रतिशत से अधिक लोग प्रदूषित हवा के कारण स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं। 68.3 प्रतिशत ने प्रदूषण से संबंधित चिकित्सा सहायता मांगी। 79.8 प्रतिशत लोग अन्य शहरों में जाने पर विचार कर रहे हैं…

Anuj Shrivastava( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
अपडेटेड27 Nov 2025, 10:35 PM IST
दिल्ली की हवा हुई जहरीली
दिल्ली की हवा हुई जहरीली

Delhi NCR Pollution Crisis: दिल्ली-एनसीआर में 80 प्रतिशत से अधिक निवासियों ने प्रदूषित हवा के कारण लगातार स्वास्थ्य समस्याओं से जूझने की बात कही है, जिनमें पुरानी खांसी, थकान महसूस होना और श्वसन संबंधी समस्या शामिल हैं। एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आयी है।

स्माइटेन पल्सएआई सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ कि 68.3 प्रतिशत लोगों ने पिछले वर्ष विशेष रूप से प्रदूषण से संबंधित रोगों के लिए चिकित्सा सहायता मांगी।सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि सर्वेक्षण में शामिल किये गए 76.4 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि वे घर से बाहर बहुत कम देर के लिए निकल रहे हैं, जिससे घर असल में जेल जैसे हो गए हैं क्योंकि परिवार जहरीली धुंध से बचने के लिए बाहर कम निकलते हैं।

4000 लोगों पर किया गया सर्वे

उपभोक्ता अनुसंधान फर्म स्मिटेन पल्सएआई ने कहा कि दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद के 4,000 निवासियों पर किये गए व्यापक अध्ययन से एक ऐसे शहर की विनाशकारी तस्वीर उभर कर सामने आती है, जो बाहरी ताकतों से नहीं बल्कि उस हवा से जूझ रहा है जिसमें यहां के लोग सांस लेते हैं।

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सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि 79.8 प्रतिशत लोग या तो किसी और शहर में जाने का विचार कर रहे हैं या पहले ही स्थान छोड़ चुके हैं, 33.6 प्रतिशत लोग यहां से जाने की योजना बना रहे हैं, 31 प्रतिशत सक्रिय रूप से इस पर विचार कर रहे हैं, और 15.2 प्रतिशत लोग पहले ही दूसरी जगह जा चुके हैं।

दूसरे शहरों शिफ्ट हो रहे लोग

सर्वेक्षण में कहा गया है कि 37 प्रतिशत लोगों ने पहले ही ठोस कदम उठा लिए हैं, जिसमें दूसरे शहरों में मकान ढूंढने के लिए जाना, स्कूलों में बच्चों के दाखिले के लिए जानकारी जुटाना, या जाने के बारे में परिवार के साथ निर्णय लेना।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि प्रदूषण से जूझ रहे लोग पहाड़ी इलाके, कम कारखानों वाले छोटे शहर, दिल्ली-एनसीआर के बाहर कहीं भी, ऐसी जगह जहां सांस लेने के लिए किसी ऐप की निगरानी की जरूरत न हो, जाना चाहते हैं।

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स्मिटेन पल्सएआई के सह-संस्थापक, स्वागत सारंगी ने कहा कि अध्ययन से पता चलता है कि लंबे समय तक खराब वायु गुणवत्ता रोज़मर्रा की जिंदगी स्वास्थ्य व्यवहार, खर्च करने के तरीके और जीवन से जुड़े फैसलों को प्रभावित कर रही है।उन्होंने कहा कि यह अब केवल एक पर्यावरणीय चिंता नहीं है, बल्कि जीवनशैली और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाला एक कारक है, जो निरंतर, डेटा-समर्थित और सहयोगात्मक कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करता है।’’

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