Indian Army Rules: क्या देसी डॉग भी हो सकता है भारतीय सेना में शामिल? जानिए Indian Army के नियम

भारतीय सेना में कुत्तों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। रेमो जैसे कुत्ते नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रशिक्षण में बेसिक कमांड, व्यवहार परीक्षण और विशेष कार्य के लिए चयन शामिल होता है…

Anuj Shrivastava( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड4 Feb 2026, 11:36 AM IST
भारतीय सेना में डॉग की ट्रेनिंग
भारतीय सेना में डॉग की ट्रेनिंग

Indian Army Dogs Training: वह सिर्फ तीन महीने का था जब उसे पहली बार 'वर्दी' वाले इंसानों के बीच लाया गया। न उसे सरहदों का पता था, न बारूद की गंध का, लेकिन आज वही 'रेमो' (कुत्ते का परिवर्तित नाम) भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) का वह जांबाज योद्धा है, जिसके लिए बारूद का पता लगा लेना महज एक खेल है। रेमो की कहानी सेना के उन सैकड़ों 'कॉम्बैट डॉग्स' की एक झलक है, जिन्हें खेल-खेल में मौत को मात देने का हुनर सिखाया जाता है।

रेमो के हैंडलर (आईटीबीपी में तैनात जवान) ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि रेमो की पहली तैनाती छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में की गई थी। यह वह क्षेत्र है जहां जमीन के नीचे नक्सलियों द्वारा दबाए गए आईईडी जवानों के लिए सबसे बड़ा खतरा होते हैं।

कितने महीने के कुत्ते को सेना में नहीं करते है शामिल?

जवान के मुताबिक रेमो ने वहां अपनी सूंघने की क्षमता से कई बार सुरक्षा बलों का रास्ता साफ किया। रेमो को एक कुशल विस्फोटक खोजी कुत्ता बनाने में पूरे नौ महीने का समय लगा। उन्होंने आगे बताया कि तीन महीने से बड़े किसी भी कुत्ते को सेना में शामिल नहीं किया जाता है। कुत्तों को न्यूनतम नौ महीने से लेकर 18 महीनों का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है।

यह भी पढ़ें | ₹50 लाख के होम लोन में बचा सकते हैं ₹20 लाख रुपये! अपनाएं ये स्ट्रैटेजी

जवान के अनुसार, शुरुआती चरण में कुत्तों को 'बेसिक कमांड' सिखाए जाते हैं, जिसमें बैठना, उठना, चलना और हैंडलर के निर्देशों का पालन करना शामिल होता है। इसी दौरान कुत्ता और हैंडलर के बीच तालमेल बनता है। हर कुत्ते का एक हैंडलर तय होता है, जो उसे प्रशिक्षण देने से लेकर ड्यूटी पूरी करवाने तक उसके (कुत्ते के) साथ काम करता है।

हैंडलर और डॉग के बीच तालमेल जरूरी

जवान ने बताया कि कुत्ता और हैंडलर के बीच तालमेल बेहद अहम होता है। अगर हैंडलर बदला जाए, तो कुत्ते को नए व्यक्ति के साथ सामंजस्य बिठाने में समय लगता है, जिससे उसका काम प्रभावित होता है।बेसिक ट्रेनिंग के बाद कुत्ते का 'बिहेवियर टेस्ट' और क्षमता परीक्षण किया जाता है। इसी के आधार पर तय किया जाता है कि किस कुत्ते को विस्फोटक की पहचान, नशीले पदार्थो की पहचान, ट्रैकिंग (अपराधियों का पता लगाना) या गार्ड ड्यूटी के लिए तैयार किया जाएगा। एक कुत्ते को केवल एक ही तरह का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।

यह भी पढ़ें | अलर्ट! PF धारकों को बड़ा झटका, घट सकती है ब्याज दर, कमाई पर पड़ेगा सीधा असर

क्या देसी डॉग को भी सेना में शामिल किया जाता है?

जवान ने बताया कि अब देशी नस्ल के कुत्तों को भी सेना में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने ये भी बताया कि अगर कोई कुत्ता उम्र या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से ड्यूटी करने में असमर्थ नजर आता है तो चिकित्सीय परीक्षण के बाद उसे सेवानिवृत्त कर, कुत्तों के लिए समर्पित स्थान पर रखा जाता है जहां आईटीबीपी द्वारा इनकी देखभाल की जाती है। आईटीबीपी के इन प्रशिक्षित कुत्तों ने नक्सल रोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भीड़-भाड़ वाले आयोजनों, कार्यक्रमों और अन्य सुरक्षा ड्यूटी में भी इन कुत्तों की तैनाती की जाती है।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़ट्रेंड्सIndian Army Rules: क्या देसी डॉग भी हो सकता है भारतीय सेना में शामिल? जानिए Indian Army के नियम
More
बिजनेस न्यूज़ट्रेंड्सIndian Army Rules: क्या देसी डॉग भी हो सकता है भारतीय सेना में शामिल? जानिए Indian Army के नियम