
Dev Deepawali: धार्मिक नगरी काशी में कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली पर सायंकाल का दृश्य मानो स्वर्गलोक जैसा प्रतीत हुआ। गंगा तट पर जगमगाते दीपों की छटा ने हर किसी का मन मोह लिया। दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमो घाट पर पहला दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की।
करीब सात किलोमीटर लंबी घाटों की श्रृंखला दीपों की अद्भुत रोशनी से नहा उठी। लाखों श्रद्धालु और पर्यटक इस दृश्य को देखने पहुंचे और इसे अपने कैमरों में कैद किया। काशी एक बार फिर वैश्विक आस्था का केंद्र बन गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल, विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य और महापौर अशोक तिवारी ने भी दीप प्रज्वलित कर मां गंगा को नमन किया। इसके बाद सभी अतिथि क्रूज पर सवार होकर गंगा आरती और घाटों पर सजी देव दीपावली का नजारा देखने निकले।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को देव दीपावली की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर अस्सी घाट से लेकर राजघाट तक फैले 84 घाटों पर लाखों दीयों की रोशनी ने अद्भुत दृश्य रचा। गंगा आरती की गूंज, शास्त्रीय संगीत की धुनें, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की रंगत और आसमान में चमकती आतिशबाजी ने इस शाम को अविस्मरणीय बना दिया। जानकारी के अनुसार इस बार घाटों पर करीब 25 लाख दीप जलाए गए, जिससे पूरा काशी नगरी मानो दिव्यता में डूब गई।
दशाश्वमेध घाट पर ‘अमर जवान ज्योति’ की अनुकृति स्थापित की गई। यहां कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। इस वर्ष देव दीपावली महोत्सव को ऑपरेशन सिंदूर के नाम समर्पित किया गया, जिसमें देश की वीर माताओं के आंचल को नमन किया गया।
इतनी बड़ी भीड़ और वीवीआईपी उपस्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त रखा। वाराणसी को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया और बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह रोक रही। घाटों पर एनडीआरएफ और जल पुलिस की टीमें बोट्स, आधुनिक उपकरणों और वाटर एम्बुलेंस के साथ तैनात थीं। नदी में नावों के लिए अलग लेन बनाई गई और नाविकों को तय दिशा और सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए।
सड़क मार्ग पर भीड़ को संभालने के लिए यातायात, पार्किंग और प्रवेश-निकास की व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित रही। महिलाओं की सुरक्षा के लिए सादी वर्दी में महिला पुलिसकर्मी, एंटी रोमियो स्क्वॉड और क्यूआरटी टीमें लगातार गश्त करती रहीं। क्यूआरटी टीमें भी तैनात की गईं।
(इनपुट्स: वार्ता)