
हिंदू धर्म में प्रबोधिनी एकादशी या देवउठनी एकादशी का बहुत खास महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं। इसलिए इसे देवउठनी एकादशी कहा जाता है। बताया जाता है कि भगवान विष्णु आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को योगनिद्रा में जाते हैं और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागते हैं। इसी दिन चातुर्मास का समापन होता है।
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष देवउठनी एकादशी 1 नवंबर को सुबह 9:11 बजे शुरू होगी और 2 नवंबर को सुबह 7:31 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा। पारण का समय 2 नवंबर को दोपहर 1:11 से 3:23 तक रहेगा।
देवउठनी एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी या देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे सभी शुभ कार्यों की शुरुआत फिर से होती है, जो चातुर्मास के दौरान रोके जाते हैं।
ऐसा विश्वास है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा करता है या व्रत रखता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है।
देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है। यह बहुत शुभ माना जाता है। महाराष्ट्र और गुजरात में इस एकादशी का पर्व बड़े उत्साह से मनाया जाता है। राजस्थान के पुष्कर मेले की शुरुआत भी इसी दिन होती है और पंढरपुर यात्रा का समापन इस दिन किया जाता है।
प्रबोधिनी एकादशी के दिन पवित्र नदियों या तीर्थस्थलों में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन किया गया स्नान अन्य किसी तीर्थ स्नान से अधिक फलदायी होता है।
स्कंद पुराण में प्रबोधिनी एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। भगवान ब्रह्मा ने स्वयं इस व्रत की महिमा की कथा नारद मुनि को सुनाई थी। ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त प्रबोधिनी एकादशी के दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की उपासना करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और मृत्यु के बाद वह सीधे वैकुंठ लोक जाता है।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)
Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.