Dev Uthani Ekadashi 2025: देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु को कैसे जगाएं? यहां पढ़ें विधि और मंत्र

Devuthani Ekadashi 2025: दे‌वउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं। इस दिन शंख, दीपक, गन्ना, सिंघाड़ा और भजन-कीर्तन के साथ भगवान को जगाया जाता है। माना जाता है कि इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है और घर में मंगल आता है। भक्त विशेष मंत्र और गीतों से श्रीहरि की आराधना करते हैं।

Priya Shandilya
अपडेटेड1 Nov 2025, 07:07 PM IST
दे‌वउठनी एकादशी पर देवों को कैसे जगाएं
दे‌वउठनी एकादशी पर देवों को कैसे जगाएं

Devuthani Ekadashi 2025: कार्तिक मास की शुक्ल एकादशी को दे‌वउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। इस साल यह देवउठनी एकादशी 1 नवंबर को मनाया जा रहा है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर की योगनिद्रा से जागते हैं और दुनिया में फिर से शुभ समय की शुरुआत होती है। इस दिन पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। इसलिए सुबह से ही घरों में पूजा, मंत्र और भक्ति का माहौल रहता है।

देव क्यों सोते हैं और क्यों जगाए जाते हैं

पौराणिक मान्यता के मुताबिक देवशयनी एकादशी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान सृष्टि की व्यवस्था भगवान शिव संभालते हैं। फिर कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी दे‌वउठनी एकादशी को भगवान को जगाया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन पूजा करने से दुख-दरिद्रता दूर होते हैं और बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।

कैसे जगाए जाते हैं श्रीहरि

देवउठनी के दिन पूजा का तरीका भी बड़ा प्यारा और घरेलू है। सुबह स्नान करके ठाकुर जी को उठाया जाता है, शंख बजाया जाता है और प्रार्थना की जाती है- "हे गोविन्द, उठिए। उठिए हे! कमलाकान्त, निद्रा का त्याग कर तीनों लोकों का मंगल करें।"

इसके बाद घर में गन्ना, सिंघाड़ा, फल, तिल, मूली, आलू आदि भगवान को अर्पित किए जाते हैं। जगह-जगह गन्ने का मंडप सजाया जाता है, सुंदर रंगोली बनाई जाती है और घी का दीपक जलाकर भगवान का स्वागत किया जाता है।

कई जगह पारंपरिक गीत की परंपरा

दे‌वउठनी एकादशी पर कई जगह खास लोकगीत गाए जाते हैं। ये गीत गांव की मिट्टी और भक्ति दोनों की खुशबू लेकर चलते हैं।

उठो देव, बैठो देव,पाटकली चटकाओ देव।

सबके काज संवारों देव

आषाढ़ में सोए देव,कार्तिक में जागो देव।

कोरा कलशा मीठा पानी, उठो देव पियो पानी।

हाथ पैर फटकारो देव,अंगुलिया चटकाओ देव।

क्वारों के व्याह कराओ देव, व्याहों के गौने कराओ देव।

तुम पर फूल चढ़ाए देव, घी का दिया जलाएं देव।

आओ देव पधारो देव, तुमको हम मनाएं देव।

जागो इस दुनिया के देव,गन्ने का भोग लगाओ देव।

जागो उस दुनियां के देव,सिंघाड़े का भोग लगाओ देव।

कहते हैं कार्तिक महीने में ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का जाप करने से मन शांत रहता है। अगर पूरा महीना न कर पाएं तो कम से कम देवउठनी एकादशी के दिन ये जरूर करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी शुभ माना जाता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पंचांगों और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य सिर्फ आपको जागरूक करना है, मिंट हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है। कृपया कोई निर्णय लेने से पहले अपनी श्रद्धा और विवेक से काम लें।

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