महाराष्ट्र के बारामती में डिप्टी सीएम अजित पवार का प्लेन गिरने के बाद प्राइवेट जेट और चार्टर एविएशन सेक्टर में सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (Directorate General of Civil Aviation - DGCA) ने नॉन-शेड्यूल्ड एविएशन सेक्टर में सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को पूरी तरह बदलने की तैयारी कर ली है। इसके लिए सभी नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स (NSOPs) का स्पेशल ऑडिट शुरू किया है। रेगुलेटर पहले फेज़ में 14 बड़े ऑपरेटर्स का ऑडिट करेगा, जबकि दूसरे फेज़ में दूसरे ऑपरेटर्स को शामिल किया जाएगा।
DGCA की ओर से जारिए किए गए आदेश के अनुसार, पहला फेज 25 फरवरी तक पूरा होने की उम्मीद है। ‘स्पेशल सेफ्टी ऑडिट प्लान 2026 – फेज 1’ नाम का यह अभ्यास 2 फरवरी को शुरू किया गया था और निरीक्षण 9 फरवरी को शुरू हुआ। यह व्यापक ऑडिट 28 जनवरी को बारामती हवाईअड्डे पर हुए विमान दुर्घटना के बाद किया जा रहा है। DGCA का कहना है कि इस ड्राइव का मकसद सुरक्षा मानकों की गहराई से समीक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि ऐसे हादसे दोबारा न हों।
15 फरवरी तक रिपोर्ट जमा करने के निर्देश
DGCA ने 2 फरवरी 2026 को M/s VSR Ventures Pvt Ltd के लियरजेट 45 एयरक्राफ्ट VT SSK हादसे को लेकर विशेष सेफ्टी ऑडिट का आदेश दिया। इसके लिए छह सदस्यीय टीम बनाई गई है, जिसकी अगुवाई डिप्टी डायरेक्टर जनरल आर के आनंद (R K Anand) कर रहे हैं। टीम में एयर सेफ्टी, एयरवर्थिनेस और फ्लाइट ऑपरेशंस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। DGCA ने इस ऑडिट रिपोर्ट को 15 फरवरी 2026 तक मुख्यालय में जमा करने का निर्देश दिया है। कंपनी के अकाउंटेबल मैनेजर को भी इसकी कॉपी भेजी गई है ताकि सुरक्षा खामियों को तुरंत दूर किया जा सके।
हो सकती है कार्रवाई
DGCA ने निर्देश दिया है कि हर ऑडिट टीम को ऑडिट पूरा होने के 10 दिन के भीतर रिपोर्ट DGCA मुख्यालय में जमा करना होगा। रिपोर्ट में सेफ्टी गैप्स, मेंटेनेंस स्टैंडर्ड्स, पायलट ट्रेनिंग और ऑपरेशनल प्रोसीजर की समीक्षा शामिल होगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर DGCA लाइसेंस सस्पेंशन, जुर्माना और सुधारात्मक निर्देश जारी कर सकता है।
प्राइवेट एविएशन सेक्टर पर सरकार का रूख सख्त
पिछले कुछ सालों से प्राइवेट जेट्स और चार्टर फ्लाइट्स में सेफ्टी से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। पुराने एयरक्राफ्ट, कमजोर मेंटेनेंस और ऑपरेशनल लापरवाही को प्रमुख जोखिम माना जा रहा है। DGCA का मानना है कि बड़े पैमाने पर सेफ्टी ऑडिट से सिस्टमेटिक खामियां सामने आएंगी और सेक्टर में सेफ्टी कल्चर मजबूत होगा।