बॉलीवुड के 'ही-मैन' धर्मेंद्र का आज निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे। धर्मेंद्र ने 89 साल की उम्र में अपने जुहू स्थित घर पर ही अंतिम सांस ली है। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने 12 नवंबर को ही ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल से परिवार के कहने पर डिस्चार्ज किया गया था। इसके बाद से घर पर ही उनका इलाज चल रहा था।
धर्मेंद्र का जन्म पंजाब के फगवारा में 08 दिसंबर 1935 को हुआ था। उन्होंने वर्ष 1960 में प्रदर्शित फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे से अपने सिने करियर की शुरूआत की थी। धर्मेन्द्र ने अपने छह दशक लंबे सिने करियर में 250 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया था।
धर्मेंद्र भारतीय सिनेमा के उन दिग्गज कलाकारों में से हैं जिन्होंने फिल्मों को कई यादगार पल और दमदार डायलॉग दिए। उनकी एक्टिंग ही नहीं, बल्कि उनके बोले हुए डायलॉग आज भी दर्शकों के दिल में बसते हैं। चाहे उनका गुस्से से भरा अंदाज़ हो या हास्य से भरे एक-लाइनर, उनकी बातें एक पूरी पीढ़ी की यादों में बस गई हैं। आइए उनके कुछ सबसे मशहूर डायलॉगों को फिर से याद करते हैं।
धर्मेंद्र का मशहूर डायलॉग “बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना” फिल्म शोले (1975) का हिस्सा है। इसमें वे अपने किरदार वीरू के रूप में बसंती से यह बात कहते हैं। रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी इस फिल्म को जावेद अख़्तर और सलीम खान ने लिखा था। अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, अमजद खान और असरानी ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई थी।
फिल्म यादों की बारात (1973) में धर्मेंद्र का डायलॉग “कुत्ते, कमीने, मैं तेरा खून पी जाऊंगा” बेहद लोकप्रिय हुआ। नासिर हुसैन की इस फिल्म में धर्मेंद्र के साथ विजय अरोड़ा, तारिक और ज़ीनत अमान जैसे कलाकार भी नजर आए थे।
शोले का एक और मज़ेदार डायलॉग तब आता है जब वीरू नशे में पानी की टंकी पर चढ़ जाता है और गांव वालों के लिए नाटक जैसा माहौल बना देता है। वह कहता है, “गांव वालों, तुमको मेरा आख़िरी सलाम… गुडबाय…” और फिर जोड़ता है, “इस स्टोरी में इमोशन है, ड्रामा है, ट्रेजेडी है…”
फिल्म लाइफ इन ए मेट्रो (2007) में धर्मेंद्र ने अमोल के किरदार में एक शांत और भावुक डायलॉग कहा था—“दिल के मामले में हमेशा दिल की सुननी चाहिए।” यह लाइन रिश्तों और भावनाओं की अहमियत को दिखाती है। अनुराग बासु द्वारा निर्देशित इस फिल्म में इरफान खान, कोंकणा सेन शर्मा, के के मेनन और गौतम कपूर भी थे।
फिल्म लोहा में धर्मेंद्र ने इंस्पेक्टर अमर का किरदार निभाया था। उनका दमदार डायलॉग “तुम्हारी ये गोली लोहे के शरीर के पार नहीं जा सकती” उनके मजबूत और एक्शन भरे अंदाज़ को दिखाता है। राज एन सिप्पी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शत्रुघ्न सिन्हा और करण कपूर भी प्रमुख भूमिकाओं में थे। धर्मेंद्र के ये डायलॉग उस दौर की फिल्मों की पहचान बन गए और आज भी उनकी गूंज महसूस की जा सकती है।