शोले के वीरू से जट यमला पगला दीवाना तक... धर्मेंद्र का सिनेमाई सफर

बॉलीवुड के ‘हीमैन’ धर्मेंद्र का 89 वर्ष की आयु में आज निधन हो गया। 1960 में फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे से शुरुआत करने वाले धर्मेंद्र ने रोमांस, कॉमेडी, एक्शन और पारिवारिक किरदारों में ऐसा जलवा दिखाया जो कम ही कलाकार दोहरा पाए। बंदिनी, हकीकत और शोले सहित कई फिल्मों ने उन्हें अमर स्टार बना दिया।

Rishabh Shukla
अपडेटेड24 Nov 2025, 03:29 PM IST
बॉलीवुड के ही-मैन धर्मेंद्र का निधन
बॉलीवुड के ही-मैन धर्मेंद्र का निधन

हिंदी सिनेमा के महान अभिनेता और हीमैन के नाम से मशहूर धर्मेंद्र का आज 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय फिल्म जगत शोक में डूबा है। 8 दिसंबर 1935 को पंजाब के लुधियाना में जन्मे धर्मेंद्र का पूरा नाम धर्मेंद्र केवल कृष्ण देओल था। 1960 में फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे से अपना फिल्मी सफर शुरू करने वाले धर्मेंद्र जल्द ही सिल्वर स्क्रीन के सबसे लोकप्रिय सितारों में शामिल हो गए। रोमांस, एक्शन, भावनात्मक किरदार, कॉमेडी हर शैली में उनकी पकड़ अद्भुत थी और यही उन्हें हिंदी सिनेमा का सबसे बहुमुखी स्टार बनाता है। बिमल रॉय की बंदिनी ने धर्मेंद्र को फिल्मी जगत में गंभीर अभिनेता के रूप में पहचान दिलाई। इसके बाद उनका सुनहरा सफर ऐसे आगे बढ़ा जैसे हर फिल्म दर्शकों के दिलों में स्थायी जगह बना रही हो। अपने छह दशक से अधिक लंबे करियर में धर्मंद्र ने हिंदी सिनेमा को अनगिनत यादगार फिल्में और अविस्मरणीय किरदार दिए। धर्मेंद्र ने फिल्म इंडस्ट्री में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया। आइए हम आपको धर्मेंद्र की हिट फिल्मों के बारे में बताते हैं।

फूल और पत्थर ने धर्मेंद्र को बनाया सुपर स्टार

1964 की युद्ध आधारित फिल्म हकीकत में सैनिक की भूमिका ने दर्शकों में देशभक्ति और करुणा का भाव जगाया। 1966 की फूल और पत्थर उनके करियर का पहला बड़ा मील का पत्थर साबित हुई, जिसने उन्हें सुपरस्टार की पंक्ति में ला खड़ा किया।

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धर्मेंद्र की शोले ने रचा इतिहास

1969 की सत्यकाम आज भी धर्मेंद्र के सबसे श्रेष्ठ अभिनय प्रदर्शनों में गिनी जाती है। अविनाशी लोकप्रियता तब और बढ़ी जब 1971 की मेरा गांव मेरा देश और 1972 की सीता और गीता ब्लॉकबस्टर साबित हुईं। 1975 का साल उनके करियर का सबसे चमकदार पड़ाव लेकर आया, चुपके चुपके में उनके कॉमिक टाइमिंग ने सबको चकित किया और कुछ ही महीनों बाद शोले ने इतिहास रच दिया। वीरू का किरदार उनकी अदाकारी का वह प्रतीक बन गया जिसे हर दौर में भावनाओं के साथ याद किया जाएगा।

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2007 में आई अपने भी हुई सुपरहिट

उनकी बहुमुखी प्रतिभा यहीं सीमित नहीं रही। प्रतिज्ञा के "जट यमला पगला दीवाना" ने उनका चुलबुला अंदाज अमर कर दिया, जबकि चरस ने उन्हें स्पाई थ्रिलर दुनिया में भी सुपरहिट बना दिया। धरम वीर (1977) दर्शकों के रोमांच को चरम तक ले गई और दशक दर दशक उनका स्टारडम कायम रहा। लंबे समय बाद 2007 में आई अपने ने देओल परिवार की भावनात्मक केमिस्ट्री और धर्मेंद्र के जज्बे को फिर से दर्शकों के सामने ला खड़ा किया। धर्मेंद्र को हिंदी सिनेमा के महान अभिनेता के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।

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