Dhurandhar Film Shooting locations: कई बार फिल्म देखते समय लगता है कि हम सच में उसी जगह पहुंच गए हैं जहां कहानी चल रही है। रणवीर सिंह की नई फिल्म ‘धुरंधर’ भी कुछ ऐसा ही एहसास देती है। 5 दिसंबर 2025 को रिलीज हुई इस स्पाई-थ्रिलर ने सिर्फ एक्टिंग और एक्शन से नहीं, बल्कि अपनी शूटिंग लोकेशंस से भी लोगों का ध्यान खींच लिया है। फिल्म को बनाने के लिए टीम अलग-अलग जगहों पर गई, और हर जगह ने कहानी में अपना खास रंग जोड़ा।
नीचे जानिए 5 लोकेशंस, जहां इस स्पाई थ्रिलर की शूटिंग हुई है।
बैंकॉक
फिल्म की शूटिंग की शुरुआत 25 जुलाई 2024 को बैंकॉक से हुई। यहां सिर्फ कुछ सड़कें नहीं, बल्कि पूरे-पूरे इलाके कराची के ल्यारी जैसे दिखने के लिए तैयार किए गए। तंग गलियां, रात की शूटिंग और सील की गई सड़कें, थाईलैंड की परमिशन ने ये सब मुमकिन किया। 'धुरंधर' के कुछ सीन्स देखकर ऐसा लगता है, जैसे पाकिस्तान में ही फिल्म की शूटिंग हुई हो।
अमृतसर
नवंबर 2024 में यूनिट पहुंची अमृतसर, जहां गोल्डन टेंपल के आसपास के इलाकों में फिल्म की शूटिंग हुई। त्योहारी सीजन के चलते वहां काफी भीड़ थी, जिसे कंट्रोल करना बड़ी चुनौती थी, इसलिए कई रास्ते अस्थायी रूप से बदल दिए गए। फिल्म में ये हिस्से कहानी को थोड़ा शांत, मगर भावात्मक टच देते हैं।
लेह-लद्दाख
लद्दाख में मौसम और ऊंचाई दोनों ने क्रू की परीक्षा ले ली। सौ से ज्यादा लोग खाने की दिक्कत की वजह से बीमार हो गए और शूट कुछ समय के लिए रोकना पड़ गया। यहां एक्टर अक्षय खन्ना को कम ऑक्सीजन वाली जगह पर एक्शन शूट करने के लिए पोर्टेबल ऑक्सीजन के साथ रिहर्सल करनी पड़ी। लेकिन नतीजा शानदार, ऊंचे पहाड़, खाली घाटियां और ऐसा माहौल जो खतरे का अहसास खुद देता है।
मुंबई
मुख्य एक्शन सीन और कार चेज मुंबई के मढ़ आइलैंड में फिल्माए गए। ये जगह मुंबई के पास है, लेकिन यहां का माहौल थोड़ा ऑफ-ग्रिड सा लगता है। फिल्म के कई अहम ट्रांजिशन सीन यहीं शूट हुए, जहां कहानी, प्लानिंग और एक्शन एक साथ आगे बढ़ते हैं।
लुधियाना
सबसे अलग और वायरल शूट हुआ लुधियाना के खेड़ा गांव में। कुछ ही घंटों में पूरा गांव पाकिस्तान के ग्रामीण इलाके जैसा दिखने लगा। बोर्ड, रंग, झंडे, सब कुछ बदल दिया गया। तीन से चार दिन यहां शूट चला और इन सीन ने फिल्म में तनाव और रियलिज्म दोनों बढ़ाया।
‘धुरंधर’ सिर्फ बड़े सेट्स या स्टूडियो में बनने वाली फिल्म नहीं थी। मेकर्स ने असली जगहों पर जाकर मौसम, भीड़ और हर मुश्किल का सामना किया ताकि कहानी असली लगे। शायद इसलिए फिल्म हर फ्रेम में जमी हुई लगती है, जैसे हम खुद उन जगहों को जी रहे हों।