
बासी रोटी भारतीय खाने का एक पारंपरिक हिस्सा है, जिसे पीढ़ियों से खाया जा रहा है। बहुत से लोगों का मानना है कि इसे खाना स्वास्थ्य के लिए उपयोगी होता है। यही कारण है कि बहुत से भारतीय घरों में सुबह के नाश्ते में बासी रोटी खाने का चलन है।
ऐसे में अधिकांश लोगों को लगता है कि ये हमारी हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद होती है, लेकिन आयुर्वेद कॉलेज सायन मुंबई के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अव्हाड गोरक्षनाथ का कहना है कि सुबह बासी रोटी नहीं खानी चाहिए।
दरअसल, सुबह का नाश्ता हमारे दिन की शुरुआत का सबसे महत्वपूर्ण भोजन होता है। यह शरीर को एनर्जी देता है, दिमाग को सक्रिय बनाता है और पूरे दिन के काम के लिए मजबूती देता है। ऐसे में अगर नाश्ते में बासी रोटी खाई जाए, तो यह शरीर पर गलत असर डाल सकती है।
रोटी आटे और पानी से बनती है, और जब इसे रातभर रखा जाता है तो इसमें नमी कम हो जाती है और यह सख्त हो जाती है। समय बीतने के साथ इसमें कई तरह के बदलाव आने लगते हैं, जो हमारे पाचन तंत्र पर भारी पड़ सकते हैं।
सुबह का समय ऐसा होता है जब हमारा शरीर अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं होता, पाचन धीमा रहता है। ऐसे में यदि हम बासी रोटी खा लें, तो पेट को इसे तोड़ने और पचाने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे गैस, पेट दर्द और भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
ताज़ी बनी रोटी में विटामिन, मिनरल्स और फाइबर शरीर को अच्छे से मिलते हैं। लेकिन रातभर रखी रोटी में पौष्टिक तत्व धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। सुबह नाश्ते में हमें ज्यादा एनर्जी चाहिए, पर बासी रोटी उतनी एनर्जी नहीं देती, जिससे थकान और सुस्ती महसूस हो सकती है। इसके अलावा डॉ. अव्हाड गोरक्षनाथ का कहना है कि आयुर्वेदिक सिर्फ बासी रोटी ही नहीं बल्कि उन बासी चीजों को खाने की वकालत नहीं करता है जिन्हें बनाए हुए काफी समय हो गया हो।
अगर रोटी को सही तरीके से ढककर या ठंडे स्थान पर न रखा जाए, तो उसमें बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं। ऐसे में रोटी देखने में ठीक लग सकती है, पर अंदर ऐसे सूक्ष्म जीव मौजूद हो सकते हैं जो पेट में संक्रमण, दस्त या फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकते हैं। सुबह खाली पेट ऐसे दूषित भोजन का असर और तेजी से होता है।
सुबह का नाश्ता हल्का, ताज़ा और पौष्टिक होना चाहिए। ताज़ी रोटी में शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व होते हैं और यह आसानी से पच भी जाती है। वहीं बासी रोटी पेट पर बोझ डालती है और एनर्जी देने की बजाय थकान बढ़ा सकती है। यदि समय की कमी हो तो बासी रोटी की जगह दलिया, पोहा, अंडा, दूध, फल या ताज़ी चपाती बेहतर विकल्प हैं।
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)
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