Lakshmi-Ganesh Aarti: बिना आरती अधूरी है दिवाली पूजा, यहां पढ़ें मां लक्ष्मी और गणेश जी की आरती

Lakshmi-Ganesh Aarti on Diwali: इस साल दिवाली 20 अक्तूबर 2025 को पूरे देश में धूमधाम से मनाई जा रही है। इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। शाम की आरती से पूजा पूर्ण होती है। ‘जय लक्ष्मी माता’ और ‘जय गणेश देवा’ गाकर भक्त सुख, समृद्धि और शांति की कामना करते हैं।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड20 Oct 2025, 08:17 AM IST
दिवाली 2025: लक्ष्मी-गणेश आरती
दिवाली 2025: लक्ष्मी-गणेश आरती

Diwali Ganesh-Lakshmi Aarti: दिवाली सिर्फ दीप जलाने का त्योहार नहीं, बल्कि आस्था और श्रद्धा का पर्व है। इस साल 20 अक्तूबर को पूरा देश दिवाली की रोशनी में नहा रहा है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और धन के देवता कुबेर की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

बिना आरती के पूजा है अधूरी

पूजा तब तक पूरी नहीं मानी जाती जब तक आरती न हो। दिवाली की रात जब दीपों की लौ झिलमिला रही होती है, तब आरती की गूंज पूरे माहौल को भक्ति से भर देती है। आरती से पूजा का समापन होता है और यह भक्त और भगवान के बीच एक आत्मिक जुड़ाव भी बनाती है।

भगवान गणेश की आरती (Ganesh Aarti)

गणेश जी की आरती ‘जय गणेश, जय गणेश देवा’ गाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि गणेश जी की आरती से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में शांति व बुद्धि का वास होता है।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।

माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।

लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।

कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

लक्ष्मी माता की आरती (Lakshmi Ji Ki Aarti)

दिवाली की रात ‘ॐ जय लक्ष्मी माता’ आरती गाने का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि इससे घर में धन, समृद्धि और खुशहाली का आगमन होता है। आरती के समय घर के सभी सदस्य दीप लेकर मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं।

ऊँ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥

ऊँ जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।

मैया तुम ही जग-माता।।

सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।

मैया सुख सम्पत्ति दाता॥

जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

ऊँ जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।

मैया तुम ही शुभदाता॥

कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥

ऊँ जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।

मैया सब सद्गुण आता॥

सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥

ऊँ जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।

मैया वस्त्र न कोई पाता॥

खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥

ऊँ जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।

मैया क्षीरोदधि-जाता॥

रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥

ऊँ जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।

मैया जो कोई जन गाता॥

उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥

ऊँ जय लक्ष्मी माता॥

ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। ऊँ जय लक्ष्मी माता।।

मंत्र

महालक्ष्मी नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् सुरेश्वरि। हरिप्रिये नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् दयानिधे।।

पद्मालये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं च सर्वदे। सर्व भूत हितार्थाय, वसु सृष्टिं सदा कुरुं।।

आरती पूरी होने के बाद तुलसी में आरती जरूर दिखाना चाहिए, इसके बाद घर के लोगों को आरती लेनी चाहिए।

लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त (Lakshmi-Ganesh Puja Shubh Muhurat)

दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का सही समय जानना बहुत जरूरी होता है, ताकि पूजा का पूरा फल मिले। पंडितों के अनुसार ,सोमवार को दिन से लेकर देर रात तक कभी भी पूजा की जा सकती है, लेकिन अगर आप शुभ मुहूर्त में पूजा करना चाहते हैं, तो दो खास समय सबसे बेहतर माने गए हैं। पहला शुभ समय है शाम 7:10 बजे से रात 9:06 बजे तक, जब वृष लग्न होता है। दूसरा शुभ समय है रात 2:34 बजे से तड़के 4:05 बजे तक, जब सिंह लग्न होता है। इन दोनों लग्नों को स्थिर लग्न कहा जाता है, यानी इस समय की गई पूजा से धन, सुख और शांति स्थायी रूप से घर में बनी रहती है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पंचांगों और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य सिर्फ आपको जागरूक करना है, मिंट हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है। कृपया कोई निर्णय लेने से पहले अपनी श्रद्धा और विवेक से काम लें।

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