
दीपावली, जिसे दिवाली भी कहा जाता है, हिंदू धर्म का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह त्यौहार हर साल कार्तिक महीने की अमावस्या को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन इस साल की एक खास बात यह है कि इस बार कार्तिक महीने में दो अमावस्या तिथियां आएंगी। यही वजह है कि लोगों के मन में सवाल है कि लक्ष्मी पूजा का शुभ समय प्रदोष काल या निशीथ काल में कब रहेगा। आइए जानें इससे जुड़ी जरूरी जानकारी।
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर (सोमवार) को दोपहर 3 बजकर 45 मिनट से शुरू होकर 21 अक्टूबर (मंगलवार) को शाम 5 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। यानी अमावस्या दो दिनों तक रहेगी। लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से दीपावली पूजा का शुभ समय पहले दिन, यानी 20 अक्टूबर को ही रहेगा, क्योंकि उस दिन प्रदोष काल और निशीथ काल, दोनों उपलब्ध होंगे।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, लक्ष्मी पूजा का शुभ समय केवल प्रदोष काल और निशीथ काल में ही होता है। ये दोनों समय 20 अक्टूबर की शाम को पड़ेंगे, इसलिए लक्ष्मी पूजा उसी दिन करना सबसे शुभ माना गया है।
अगले दिन यानी 21 अक्टूबर की सुबह सूर्योदय से पहले ही अमावस्या समाप्त हो जाएगी, इसलिए उस दिन दीपावली पूजा संभव नहीं होगी। हालांकि, 21 अक्टूबर की सुबह स्नान और दान के लिए कार्तिक अमावस्या का विशेष महत्व रहेगा।
हिंदू धर्म में प्रदोष काल वह समय होता है जो सूर्यास्त के बाद शुरू होता है। वहीं निशीथ काल को मध्य रात्रि का समय माना जाता है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी इसी निशीथ काल में पृथ्वी पर आती हैं। इसलिए इस समय दीप जलाना और पूजा करना बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है।
साल 2025 का दीपोत्सव बहुत खास रहेगा क्योंकि इस बार यह छह दिनों तक मनाया जाएगा। इन दिनों में लोग घर सजाएंगे, दीपक जलाएंगे, मिठाइयां बांटेंगे और भगवान गणेश व मां लक्ष्मी की पूजा करेंगे ताकि उनके घर में सुख-समृद्धि बनी रहे।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)
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