मेंटल हेल्थ पर आप भी लेते हैं AI की मदद? एक्सपर्ट्स की सलाह जान लीजिए

AI in Mental Health: मानसिक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में AI कितना मददगार हो सकता है और इसकी क्या सीमा है, इस पर एक्सपर्ट्स ने अपनी राय दी है। उनके मुताबिक, AI डॉक्टरों की जगह नहीं ले सकते, लेकिन मरीजों और डॉक्टरों की मदद जरूर कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने कुछ चिंताएं भी जताईं।

एडिटेड बाय Naveen Kumar Pandey( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड10 Jul 2026, 06:07 PM IST
मानसिक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एआई की बढ़ रही है भूमिका (सांकेतिक तस्वीर)
मानसिक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एआई की बढ़ रही है भूमिका (सांकेतिक तस्वीर)

AI use for mental health: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित चैटबॉट मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का विकल्प नहीं बन सकते, लेकिन अवसाद जैसी मानसिक समस्याओं की शुरुआती पहचान करने और लोगों को समय रहते सहायता उपलब्ध कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

दुनियाभर में एआई चैटबॉट्स लोगों के लिए साथी, सलाहकार और भावनाएं साझा करने के माध्यम के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। बढ़ती संख्या में लोग मानसिक तनाव, भावनात्मक सहयोग और अपनी मानसिक स्थिति को बेहतर ढंग से समझने के लिए इनका सहारा ले रहे हैं।

लंबी वेटिंग लिस्ट के कारण भी बढ़ा AI के प्रति रुझान

अध्ययनों को देखें तो कई यूजर्स व्यक्तिगत समस्याओं पर चर्चा करने, भावनात्मक समर्थन पाने, अपनी भावनाओं पर विचार करने और मानसिक स्वास्थ्य को समझने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चैटबॉट लोगों के प्रति पूर्वाग्रह नहीं रखते। न्यूजीलैंड तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में लंबी प्रतीक्षा सूची होती है जबकि एआई चैटबॉट्स तुरंत बातचीत के लिए हमेशा उपलब्ध होते हैं।

मेंटल हेल्थ में AI के उपयोग और इनकी सीमाएं

हालांकि, मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एआई के बढ़ते उपयोग के साथ यह समझना भी जरूरी होता जा रहा है कि यह तकनीक कहां तक उपयोगी है और इसकी सीमाएं क्या हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, मौजूदा एआई चैटबॉट जटिल सवालों के जवाब देने से लेकर रिश्तों से जुड़ी सलाह देने तक कई काम कर सकते हैं और उनकी बातचीत काफी हद तक मानवीय एवं सहानुभूतिपूर्ण प्रतीत होती है।

सकारात्मक बदलाव में सहयोगी हो सकता है AI

मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए शोध बताते हैं कि एआई कुछ परिस्थितियों में उपयोगी जानकारी उपलब्ध करा सकता है, आत्मविश्लेषण के लिए प्रेरित कर सकता है और भावनात्मक सहयोग भी दे सकता है।

कुछ अध्ययनों में यह भी संकेत मिले हैं कि सावधानीपूर्वक विकसित और उचित तरीके से इस्तेमाल किए जाने पर एआई आधारित मानसिक स्वास्थ्य उपकरण चिंता और अवसाद के लक्षणों को कम करने में मददगार हो सकते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, एआई लोगों को कठिन परिस्थितियों को अलग नजरिये से देखने के लिए प्रेरित कर वैचारिक बदलाव (Cognitive Reframing) का अभ्यास कराने में भी सहायक हो सकता है।

AI से गलत सलाह मिलने की भी आशंका

हालांकि, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और नियामकों ने इसके संबंध में गंभीर चिंताएं भी जताई हैं। उनका कहना है कि एआई कभी-कभी गलत सलाह दे सकता है, हानिकारक धारणाओं को मजबूत कर सकता है और संकट के संकेतों को पहचानने में विफल हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई भले ही संवेदनशील प्रतीत हो, लेकिन वह व्यक्ति की वास्तविक परिस्थितियों और भावनाओं को मनुष्य की तरह नहीं समझ सकता। साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की तरह एआई पर पेशेवर और नियामकीय जवाबदेही भी लागू नहीं होती।

मेंटल हेल्थ में मानवीय भावनाएं बहुत महत्वपूर्ण

उनके अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य देखभाल केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भरोसा, सहानुभूति, चिकित्सकीय निर्णय क्षमता और मानवीय जुड़ाव की अहम भूमिका होती है। यही वजह है कि अधिकांश विशेषज्ञ एआई को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का सहयोगी उपकरण मानते हैं, न कि उसका विकल्प।

क्या इन संकेतों को समझ सकता है एआई?

ऑकलैंड विश्वविद्यालय के '2DN' रिसर्च ग्रुप के वैज्ञानिक यह अध्ययन कर रहे हैं कि क्या एआई बोलने के तरीके, आवाज के उतार-चढ़ाव, शब्दों के चयन और भावनात्मक अभिव्यक्ति जैसे संकेतों के आधार पर अवसाद के शुरुआती लक्षणों की पहचान कर सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, ये संकेत ऐसे 'डिजिटल बायोमार्कर' हैं, जिनके माध्यम से किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में जानकारी मिल सकती है। इस दिशा में चेहरे के भाव, नींद के पैटर्न और शारीरिक गतिविधियों जैसे अन्य संकेतकों पर भी शोध जारी है।

डॉक्टरों की जगह नहीं ले सकता, मददगार जरूर है AI

उन्होंने कहा कि इस शोध का उद्देश्य एआई के जरिए चिकित्सकों का स्थान लेना नहीं, बल्कि ऐसे उपकरण विकसित करना है जो शुरुआती जांच और निगरानी में मदद करें तथा उन लोगों की पहचान कर सकें जिन्हें आगे चिकित्सकीय मूल्यांकन की जरूरत हो सकती है।

शोधकर्ताओं ने इसकी तुलना उन पहनने, धारण करने योग्य उपकरणों (वियरेबल डिवाइस) से की है जो हृदय की असामान्य गतिविधियों का पता लगा सकते हैं, लेकिन हृदय रोग विशेषज्ञ का विकल्प नहीं होते।

विशेषज्ञों का मानना है कि एआई मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने, वंचित समुदायों तक सहायता पहुंचाने, समस्याओं की शुरुआती पहचान करने और लोगों को अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकता है। पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण आंकड़ों के आधार पर यह व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप सहायता भी उपलब्ध करा सकता है।

एक्सपर्ट्स की AI को लेकर यह चेतावनी

हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े अत्यंत संवेदनशील होते हैं, इसलिए उनकी गोपनीयता, सुरक्षा और सूचित सहमति सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि एआई प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल किए गए आंकड़ों में मौजूद पक्षपात को भी अपनाकर विभिन्न समुदायों के लिए अलग-अलग स्तर पर प्रभावी हो सकता है।

AI पर मत करें जरूरत से ज्यादा भरोसा

शोधकर्ताओं के अनुसार, एक अन्य चिंता का कारण लोगों का एआई पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करना है। हालिया अध्ययनों से संकेत मिले हैं कि कई बार लोग एआई की सलाह को बिना सवाल किए स्वीकार कर लेते हैं, जबकि वह गलत भी हो सकती है। मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

डॉक्टरों की मदद करेगा एआई

इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में एआई की भूमिका बढ़ना तय है। उनका कहना था कि इसकी सबसे बड़ी उपयोगिता लोगों को अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर ढंग से समझने और जोखिमों की समय रहते पहचान करने में डॉक्टरों की सहायता देने में हो सकती है।

उनके अनुसार, तकनीक पैटर्न पहचान सकती है, जबकि सहानुभूति, भरोसा और चिकित्सकीय निर्णय क्षमता केवल मनुष्य ही उपलब्ध करा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य संभवतः इन दोनों की क्षमताओं के संतुलित समन्वय पर निर्भर करेगा।

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