फाइबर को उतनी चर्चा नहीं मिलती जितनी प्रोटीन को मिलती है। न ही कार्बोहाइड्रेट और फैट की तरह इस पर बहस होती है। लेकिन चुपचाप यह शरीर के अंदर बहुत महत्वपूर्ण काम करता है। पाचन सुधारना, ब्लड शुगर संतुलित रखना, कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करना और आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देना, ये सब फाइबर के काम हैं।
एनएचएस के अनुसार वयस्कों को रोज लगभग 30 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। लेकिन अधिकतर लोग इससे कम ही ले पाते हैं।
आमतौर पर फाइबर के लिए सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है। हरी सब्जियां ज्यादा खाएं, एक सर्विंग और जोड़ें। लेकिन हर किसी को सब्जियां पसंद नहीं होतीं और जब सब्जियां कम खाई जाती हैं तो फाइबर भी कम हो जाता है।
22 फरवरी को इंस्टाग्राम पर कैलिफोर्निया के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी, जिन्होंने एम्स, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से प्रशिक्षण लिया है, ने 10 ऐसे फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ बताए जो सब्जियां नहीं हैं और फाइबर की कमी पूरी करने में मदद कर सकते हैं।
- काबुली चना: आधा कप में लगभग 6 ग्राम फाइबर मिलता है। इसमें फाइबर और प्रोटीन दोनों होते हैं।
- रसभरी: एक कप में करीब 8 ग्राम फाइबर होता है। ताजी या जमी हुई, दोनों तरह से खाई जा सकती है।
- ब्लैकबेरी: एक कप में लगभग 7.5 ग्राम फाइबर मिलता है। यह भी फाइबर से भरपूर फल है।
- नाशपाती: एक मध्यम आकार की नाशपाती अगर छिलके सहित खाई जाए तो 5 से 6 ग्राम फाइबर देती है।
- ओट्स: आधा कप सूखे ओट्स में लगभग 5 ग्राम फाइबर होता है। ओट्स में बीटा ग्लूकान नाम का घुलनशील फाइबर होता है जो कोलेस्ट्रॉल कम करने और हृदय स्वास्थ्य सुधारने में मदद करता है।
- क्विनोआ: एक कप पकी हुई क्विनोआ में करीब 5 ग्राम फाइबर होता है।
- काले राजमा: आधा कप पके हुए काले राजमा में लगभग 7.5 ग्राम फाइबर के साथ अच्छा प्रोटीन भी मिलता है।
फाइबर क्यों जरूरी है?
फाइबर मल त्याग को नियमित रखने में मदद करता है, ब्लड शुगर को स्थिर रखता है और कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक हो सकता है। यह आंतों के लाभकारी बैक्टीरिया को भी पोषण देता है। फिर भी आजकल के आहार में प्रोटीन ज्यादा और फाइबर कम होता है।
समाधान यह नहीं कि जबरदस्ती ज्यादा सब्जियां खाई जाएं। छोटे बदलाव भी काफी हैं। दही में बीज मिलाना, रिफाइंड सीरियल की जगह ओट्स चुनना, सलाद में बीन्स डालना। धीरे धीरे किए गए ये बदलाव बड़ा फर्क ला सकते हैं। रोज 30 ग्राम फाइबर लेना किसी सख्त डाइट से ज्यादा जागरूकता की बात है। फाइबर चुप रहता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर अपना असर जरूर दिखाता है।
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)