Coffee use in heart diseas: लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि कॉफी जैसे कैफीन वाली ड्रिंक्स हार्ट की सेहत के लिए सही नहीं है। धारणा यह थी कि कैफीन से एट्रियल फाइब्रिलेशन (AFib) ट्रिगर हो सकती हैं। AFib एक तरह का दिल की अनियमित लय है जिससे लकवे का खतरा बढ़ सकता है।
लेकिन, अमेरिका के एक बड़े क्लिनिकल ट्रायल ने इस पुरानी धारणा को चुनौती दी है। इस शोध के मुताबिक, मध्यम मात्रा में कॉफी पीना न सिर्फ सुरक्षित है, बल्कि यह AFib से पीड़ित लोगों के लिए संभावित रूप से फायदेमंद भी है। इस 'डिकैफिनेटेड कॉफी कंजम्पशन ऑर एबस्टिनेंस टू रिड्यूस एट्रियल फाइब्रिलेशन रिकरेंस (DECAF)' स्टडी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
AFib के मरीजों पर दुनिया का पहला रैंडमाइज्ड ट्रायल
यह शोध यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को (UCSF) के हार्ट स्पेशलिस्ट्स ने किया है। इसकी अगुआई डॉ. ग्रेगरी मार्कस ने की। इस ट्रायल की खास बात यह है कि यह दुनिया का पहला रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल है, जिसने सीधे तौर पर कॉफी पीने और AFib के बार-बार होने के बीच के कनेक्शन की जांच की है।
इस स्टडी में 1,200 से ज्यादा एडल्ट्स को शामिल किया गया, जिन्हें पहले से ही AFib डायग्नोस हो चुका था और वे एब्लेशन नामक इलाज से गुजर चुके थे। इन लोगों की औसत आयु लगभग 60 साल थी। प्रतिभागियों को दो ग्रुप में बांटा गया- एक ग्रुप को रोजाना (300 मिलीग्राम तक 1-2 कप कैफीन वाली कॉफी पीने के लिए कहा गया, जिसमें सुबह की कॉफी पर खास फोकस था। दूसरे ग्रुप ने कॉफी और कैफीन से पूरी तरह परहेज किया। छह महीने तक चली इस स्टडी में स्मार्टवॉच जैसे वियरेबल डिवाइस से उनकी हार्ट एक्टिविटी को लगातार ट्रैक किया गया।
कॉफी पीने वालों को हुआ दिल की इस बीमारी में फायदा
शोधकर्ताओं ने स्टडी के बाद जो नतीजे पाए, वे काफी चौंकाने वाले थे। उन्होंने पाया कि कॉफी पीने वाले ग्रुप में AFib या एट्रियल फ्लटर के फिर से होने वाले एपिसोड्स की दर काफी कम थी। कॉफी पीने वाले ग्रुप के 47% प्रतिभागियों में ही AFib रिपीट हुई।
वहीं, कॉफी से परहेज करने वाले ग्रुप के 64% प्रतिभागियों में यह समस्या फिर से हुई। इस डेटा से पता चलता है कि मध्यम मात्रा में कॉफी पीने से AFib के रिस्क में करीब 40% की कमी आ सकती है। डॉ. मार्कस ने कहा, ‘हमारे नतीजों से साफ है कि कैफीन वाली कॉफी AFib के खतरे को नहीं बढ़ाती है, बल्कि यह इसे कम भी कर सकती है।’
सुबह कॉफी पीने से दिल की लय स्थिर रही
स्टडी में यह भी पाया गया कि सुबह के समय कॉफी पीने से हृदय की लय को स्थिर रखने में मदद मिली। रिसर्चर्स का मानना है कि दिन की शुरुआत में कैफीन का असर हार्ट पर पॉजिटिव प्रभाव डालता है। कॉफी पीने वाले मरीजों में स्ट्रोक जैसी हृदय संबंधी अन्य जटिलताओं का खतरा भी कम दर्ज किया गया।
स्टडी में डिकैफिनेटेड कॉफी का कोई प्रभाव नहीं देखा गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह लाभ मुख्य रूप से कैफीन से ही जुड़ा है। साथ ही, किसी भी प्रतिभागी में कॉफी के कारण कोई गंभीर साइड इफेक्ट्स रिकॉर्ड नहीं किए गए, जो AFib के मरीजों के लिए कॉफी को सुरक्षित साबित करता है।
डॉक्टरों की सलाह और सीमाएं
यह क्लिनिकल ट्रायल अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) की 2025 की सालाना मीटिंग में पेश किया गया और 9 नवंबर, 2025 को जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (JAMA) में प्रकाशित हुआ। यह पहला रैंडमाइज्ड ट्रायल होने के कारण, यह कारण-प्रभाव (causality) स्थापित करता है। अब चिकित्सक AFib वाले मरीजों को कॉफी से पूरी तरह बचने के बजाय, मध्यम सेवन की सलाह दे सकते हैं।
UCSF के शोधकर्ताओं का सुझाव है कि रोजाना 1-2 कप कॉफी का सेवन सुरक्षित है और इसे एक्सरसाइज और अच्छी डाइट जैसे हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ जोड़ना चाहिए। हालांकि, यह स्टडी केवल उन मरीजों पर आधारित थी जिनका एब्लेशन हो चुका था। इसलिए, सामान्य आबादी पर इसका क्या असर होगा, इसकी जांच अभी बाकी है। साथ ही, 6 महीने से ज्यादा समय तक के प्रभावों पर भी रिसर्च जरूरी है।
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