फाइबर एक ऐसा पोषण शब्द है जिसे लगभग हर कोई जानता है। कहा जाता है कि फाइबर ज्यादा खाइए और पाचन ठीक हो जाएगा। सुनने में यह आसान लगता है, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता।
आहार फाइबर एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट है जो पौधों से मिलता है और शरीर इसे न तो पचा पाता है और न ही पूरी तरह अवशोषित कर पाता है। इसका मुख्य काम पाचन और मल त्याग में मदद करना है। फाइबर दो तरह का होता है जिसे घुलनशील और अघुलनशीलकहा जाता है।
घुलनशील फाइबर पानी में घुलकर पेट में जैल जैसा बन जाता है। यह पाचन की गति को धीमा करता है और कोलेस्ट्रॉल व ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह ओट्स, मटर, बीन्स और इसबगोल जैसी चीजों में पाया जाता है।
वहीं अघुलनशील फाइबर पानी में नहीं घुलता। यह भोजन में भराव बढ़ाता है और उसे आंतों से आगे बढ़ने में मदद करता है। साबुत गेहूं का आटा, गेहूं का चोकर, मेवे और दालें इसके अच्छे स्रोत हैं। इसके बावजूद कई लोग पर्याप्त फाइबर लेने के बाद भी कब्ज की समस्या से जूझते हैं।
16 जनवरी को इंस्टाग्राम पर न्यूट्रिशनिस्ट और गट हेल्थ एजुकेशन प्लेटफॉर्म द गट परस्पेक्टिव की संस्थापक परिधि गर्ग ने बताया कि सिर्फ फाइबर बढ़ाना हमेशा समाधान नहीं होता। उनके शब्दों में, “फाइबर अकेले काम नहीं करता।” इसके लिए कुछ और बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
शारीरिक गतिविधि
फाइबर को असर दिखाने के लिए आंतों की हलचल जरूरी होती है। रोजाना चलना, हल्का योग, स्ट्रेचिंग या खाने के बाद थोड़ी देर टहलना भी मददगार हो सकता है। आंतों को मूवमेंट पसंद है।
पानी की मात्रा
फाइबर मल में पानी खींचता है जिससे वह नरम होता है। अगर शरीर में पानी की कमी हो तो फाइबर उल्टा असर कर सकता है। दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीना ज्यादा फायदेमंद है। सुबह गुनगुना पानी पीने से भी पेट साफ होने में मदद मिल सकती है।
संतुलन
फाइबर तब बेहतर काम करता है जब उसे अकेला नहीं छोड़ा जाता। फल, सब्जियां और साबुत अनाज को प्रोटीन और हेल्दी फैट के साथ लें। जैसे दही, अंडे, पनीर, दाल, मेवे या बीज। इससे पाचन ज्यादा स्थिर रहता है।
धीरे बढ़ाना
एकदम से बहुत ज्यादा फाइबर लेना आंतों पर दबाव डाल सकता है। शरीर को समय चाहिए। हर हफ्ते करीब 10 से 15 प्रतिशत फाइबर बढ़ाने से आंतों और अच्छे बैक्टीरिया को ढलने का मौका मिलता है।
तनाव
आंतें हमारे नर्वस सिस्टम से गहराई से जुड़ी होती हैं। अनियमित भोजन, नींद की कमी और जल्दबाजी में खाना पाचन को बिगाड़ सकता है। समय पर खाना, आराम से खाना और पर्याप्त नींद पाचन को बेहतर बना सकती है। परिधि गर्ग ने कहा, “कब्ज सिर्फ फाइबर की समस्या नहीं है। यह पूरे सिस्टम से मदद की मांग करता है।”
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)