Ekadashi kab ki hai: मार्च में पड़ रहीं दो एकादशी, जानिए पापमोचनी और कामदा एकादशी की तिथि और पूजा विधि

एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र व्रत है, जिसमें भक्त सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास रखकर पूजा करते हैं। 2026 में पापमोचनी एकादशी 14–15 मार्च और कामदा एकादशी 28–29 मार्च को है। व्रत का पारण द्वादशी पर किया जाता है। इस दिन चावल वर्जित होता है और विष्णु मंत्रों का जाप किया जाता है।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड12 Mar 2026, 11:51 AM IST
ekadashi vrat
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एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और इसे हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है। इस शुभ अवसर पर भक्त सूर्योदय से सूर्यास्त तक व्रत रखते हैं और पूरे श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। एकादशी हर महीने दो बार आती है, एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। इस व्रत का समापन अगले दिन द्वादशी तिथि पर पारण के समय किया जाता है।

पापमोचनी एकादशी 2026 तिथि और समय

  • एकादशी तिथि शुरू – 14 मार्च 2026 सुबह 08:10 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त – 15 मार्च 2026 सुबह 09:16 बजे
  • पारण समय – 16 मार्च 2026 सुबह 06:30 बजे से 08:54 बजे तक
  • पारण वाले दिन द्वादशी समाप्ति समय – सुबह 09:40 बजे

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कामदा एकादशी 2026 तिथि और समय

  • एकादशी तिथि शुरू – 28 मार्च 2026 सुबह 08:45 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त – 29 मार्च 2026 सुबह 07:46 बजे
  • पारण समय – 30 मार्च 2026 सुबह 06:14 बजे से 07:09 बजे तक
  • पारण वाले दिन द्वादशी समाप्ति समय – 30 मार्च 2026 सुबह 07:09 बजे

जानिए एकादशी का महत्व

एकादशी को भगवान विष्णु की पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और भगवान श्री हरि की विशेष पूजा-अर्चना करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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एक साल में कुल 24 एकादशी आती हैं, जो हर महीने शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में दो बार पड़ती हैं। हिंदू धर्म में इस दिन का बहुत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस अवसर पर भक्त व्रत रखते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं, भोग प्रसाद चढ़ाते हैं, व्रत कथा सुनते हैं और भगवान से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

जानिए एकादशी पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
  • घर और पूजा स्थल को साफ करें और फिर पूजा की तैयारी करें।
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें, कई लोग श्री यंत्र भी रखते हैं।
  • देसी घी का दीपक जलाएं, फूलों से भगवान को सजाएं और घर में बने मीठे पकवान का भोग लगाएं।
  • “विष्णु महा मंत्र” और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
  • पूरा दिन भगवान का नाम जपते रहें और भक्ति में समय बिताएं।
  • शाम को फिर से भगवान विष्णु की पूजा करें और आरती के साथ पूजा संपन्न करें।

इस व्रत को अगले दिन द्वादशी तिथि पर पारण करके खोला जाता है। जो लोग पूरा व्रत नहीं रख सकते, वे सात्विक भोजन, फल, दही के साथ तले हुए आलू और दूध से बने पदार्थ खा सकते हैं। हालांकि एकादशी के दिन चावल खाना सख्त मना होता है।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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