
Ethiopia volcano eruption: अफ्रीका के दूर-दराज इलाके में फटे ज्वालामुखी का असर भारत तक हुआ है। सोमवार देर रात इथियोपिया में फटे ज्वालामुखी की राख हवा के तेज बहाव के साथ भारत के ऊपर पहुंच गई। इससे लोगों में यह सवाल उठने लगे कि क्या यह राख मौसम, हवा या स्वास्थ्य को प्रभावित करेगी।
इथियोपिया के अफार इलाके में स्थित हैली गुबी ज्वालामुखी लगभग 12,000 साल बाद रविवार 23 नवंबर को फट पड़ा। लावा तो बाहर नहीं आया, लेकिन आसमान में करीब 14 किलोमीटर ऊंचाई तक एक विशाल राख का गुबार उठ गया। सोशल मीडिया पर दिख रही सफेद धुएं की मोटी धार भी इसी का हिस्सा बताई जा रही है।
सोमवार रात करीब 11 बजे राख का गुबार हवा के रुख के साथ भारत की ओर बढ़ा और मंगलवार को गुजरात, दिल्ली-NCR, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के ऊपर से गुजरा। इससे लोगों में डर था कि कहीं भारत के शहरों की हवा खराब तो नहीं हो जाएगी।
ताजा जानकारी के मुताबिक, IMD ने मंगलवार रात 10:30 बजे बताया कि राख अब भारत की हवा से पूरी तरह बाहर निकल चुकी है। पहले दिए अपडेट में IMD ने बताया था कि राख का गुबार करीब 45,000 फीट तक उठा था और इसी वजह से एयर रूट्स प्रभावित हुए थे।
आसमान के ऊपरी हिस्से में राख होने से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों ने रूट बदल दिए या कैंसिल करनी पड़ीं। एयर इंडिया ने 11 उड़ानें रद्द कर दीं ताकि उन विमानों की जांच हो सके जो प्रभावित रूट पर गए थे। अकासा एयर को भी जेद्दा, कुवैत और अबू धाबी जाने वाली उड़ानें रोकनी पड़ीं। दिल्ली एयरपोर्ट से भी कम से कम 7 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द और कई देर से चलीं।
IMD के डायरेक्टर जनरल मृत्युंजय महापात्रा का साफ कहना है कि राख सिर्फ ऊपरी ट्रोपोस्फेयर में थी, जहां अंतरराष्ट्रीय उड़ानें चलती हैं। उन्होंने कहा, “मौसम और एयर क्वालिटी पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। राख अब शाम तक चीन की दिशा में बढ़ जाएगी।”
उत्तरी इथियोपिया के अफडे़रा जिले में स्वास्थ्य अधिकारी अब्देला मुस्सा ने बताया कि वहां के लोग खांसी जैसी दिक्कत झेल रहे हैं। बड़ी अफार रीजन से मोबाइल मेडिकल सर्विसेज को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि दो मेडिकल टीमें प्रभावित इलाकों जैसे फिया और नेम्मा‑गुबी में भेजी गई हैं ताकि लोगों को मोबाइल हेल्थ सर्विस दी जा सके। वहीं, पशुपालन अधिकारी नूर मुस्सा ने बताया कि जानवरों को साफ पानी और घास नहीं मिल पा रही है। खासकर इन दो इलाकों में जानवर पानी नहीं पी पा रहे और घास भी ज्वालामुखी की राख से ढकी हुई है।
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