How Exercise Fights Cancer: अगर आप अब तक इस बात पर ठीक से भरोसा नहीं कर पा रहे हैं कि एक्सरसाइज करने से कैंसर का रिस्क कम हो जाता है, तो यह खबर आपके लिए है। येल स्कूल ऑफ मेडिसिन के रिसर्चरों ने एक संभावित तरीका खोजा है जिससे व्यायाम ट्यूमर के विकास को रोक सकता है।
उन्होंने पाया कि एरोबिक फिटनेस शरीर के अंदर मेटाबॉलिज्म (चयापचय) की प्रक्रिया को इस तरह बदल देती है कि कैंसर वाली कोशिकाओं को बढ़ने के लिए कम ऊर्जा मिलती है। यह अध्ययन कैंसर से लड़ने में एक एक्टिव लाइफस्टाइल के महत्व पर प्रकाश डालता है।
मोटे चूहों पर की गई स्टडी
येल स्कूल ऑफ मेडिसिन की राहेल पेरी और उनकी टीम ने इस संभावना की जांच करने के लिए एक प्रयोग किया। उन्होंने 18 चूहों में स्तन कैंसर कोशिकाएं इंजेक्ट कीं। इनमें से 12 चूहों को ऐसा आहार दिया गया था जिससे वे मोटे हो गए, क्योंकि मोटापा कई प्रकार के कैंसर के बढ़ने को बढ़ावा देता है। फिर, उन्होंने आधे चूहों को एक एक्सरसाइज व्हील दिया, ताकि वे अपनी इच्छानुसार जितना चाहें उतना दौड़ सकें।
एक्सरसाइज से 60% तक छोटे हो गए ट्यूमर
रिसर्च में पाया गया कि चार सप्ताह के बाद जिन मोटे चूहों ने एक्सरसाइज की थी, उनमें ट्यूमर का आकार उन मोटे चूहों की तुलना में 60 प्रतिशत तक छोटा हो गया, जिन्हें एक्सरसाइज व्हील नहीं मिला था। दिलचस्प बात यह है कि व्यायाम करने वाले मोटे चूहों के ट्यूमर सामान्य डाइट लेने वाले, निष्क्रिय चूहों के ट्यूमर से भी थोड़े छोटे थे। यह प्रभाव 30 मिनट की एक्सरसाइज के एक दौर के बाद भी देखने को मिला।
मांसपेशियां ज्यादा ग्लूकोज का करती हैं इस्तेमाल
शोधकर्ताओं ने बताया कि 30 मिनट की एक्सरसाइज के बाद कंकाल (Skeletal) और हृदय की मांसपेशियों में ऑक्सीजन और प्रमुख ऊर्जा स्रोत ग्लूकोज का अवशोषण (Absorption) बढ़ गया था। इसके ठीक विपरीत, ट्यूमर में ग्लूकोज का अवशोषण कम हो गया। पेरी के अनुसार, यह काम दिखाता है कि एरोबिक फिटनेस मांसपेशियों और ट्यूमर के बीच मेटाबॉलिक कॉम्पिटिशन को पूरी तरह से बदल देती है।
ट्यूमर की ग्रोथ रोकने वाला प्रोटीन
टीम ने जीन की गतिविधि का विश्लेषण किया और 417 मुख्य मेटाबॉलिक मार्गों की पहचान की जो व्यायाम के कारण बदल जाते हैं। इसका मतलब है कि मांसपेशियों के ऊतक (Tissue) अधिक ग्लूकोज का चयापचय (Metabolism) करते हैं, जबकि ट्यूमर के ऊतक कम ग्लूकोज का इस्तेमाल करते हैं। शोधकर्ताओं ने विशेष रूप से यह बताया कि कैंसर कोशिकाओं में mTOR (एक प्रोटीन जो कोशिका वृद्धि में शामिल है) का 'डाउन-रेगुलेशन' होने से ट्यूमर का विकास रुक सकता है।
मनुष्यों पर भी हो सकता है ऐसा ही असर
राहेल पेरी का कहना है कि मेटाबॉलिक मार्ग स्तनधारियों में बहुत समान होते हैं, इसलिए उन्हें उम्मीद है कि मनुष्यों में भी यही प्रक्रिया होगी। ऑस्ट्रेलिया के एडिथ कोवान यूनिवर्सिटी के रॉब न्यूटन ने भी इस बात से सहमति जताई।
उन्होंने कहा, 'हमें मनुष्यों पर एक क्लिनिकल ट्रायल की जरूरत है, लेकिन मुझे सच में कोई कारण नजर नहीं आता कि इंसानों में भी ऐसा ही प्रभाव क्यों नहीं होगा।' शोधकर्ताओं ने यह भी साफ किया कि यह एक्सरसाइज 'स्वैच्छिक' थी, यानी चूहों ने मैराथन-प्रकार का व्यायाम नहीं किया, बल्कि वे उतना ही दौड़े जितना वे चाहते थे।