
Jeffrey Epstein Truth: अमेरिकी न्याय विभाग ने हाल ही में जेफरी एपस्टीन से जुड़ी लाखों फाइलें सार्वजनिक की है, जिसके बाद से ही कई तरह के दावे सोशल मीडिया वायरल होने लगे हैं। इनमें सबसे चौंकाने वाला दावा ये था कि एपस्टीन बच्चों को खाता था और नरभक्षण (Cannibalism) में शामिल था। ये दावा तेजी से वायरल हो रहा है और कई प्लेटफॉर्म्स पर इसे सच मानकर यूजर्स शेयर कर रहे हैं। अगर आप भी इस दावे की सच्चाई जानना चाहते हैं, तो चलिए आपको सच्चाई बताते हैं।
अमेरिकी न्याय विभाग ने जनवरी 2026 में एपस्टीन से जुड़ी लगभग तीन मिलियन फाइलें सार्वजनिक कीं। इन दस्तावेजों में Cannibal शब्द 52 बार और Cannibalism शब्द 6 बार दर्ज है। इसी आधार पर सोशल मीडिया पर ये अफवाह फैली है कि एपस्टीन बच्चों को खाता था। कई पोस्ट्स में इसे सबसे बड़ा खुलासा बताया जा रहा है कि एपस्टीन अनुष्ठानिक बलि (Ritual Sacrifice) और नरभक्षण में शामिल था।
फाइलों में इन शब्दों का उल्लेख जरूर है, लेकिन उन सभी दावों से जोड़कर नहीं लिखा गया है। ये संदर्भ अस्पष्ट है। कहीं भी सीधे तौर पर एपस्टीन के बच्चों को खाने या नरभक्षण में शामिल होने का सबूत नहीं मिलता। विशेषज्ञों का कहना है कि ये शब्द संदिग्ध और अपुष्ट दस्तावेजों से जुड़े हैं,जिन्हें प्रमाणिक नहीं माना जा सकता। कई बार ऐसे दस्तावेजों में अफवाहें और आरोप या होते हैं, जिन्हें तथ्य मान लेना गलत है।
जेफरी एपस्टीन एक बहुत अमीर फाइनेंसर था, लेकिन उस पर गंभीर अपराधों के आरोप लगे थे। कहा जाता है कि उसने नाबालिग लड़कियों की तस्करी की और उनका शोषण किया। 2019 में जब वह जेल में था, तभी उसकी मौत हो गई। उसकी मौत के बाद से ही उसके बारे में कई तरह की कहानियां और अफवाहें फैलती रहीं। कुछ लोगों ने कहा कि उसकी हत्या हुई थी, तो कुछ ने उसके बड़े नेटवर्क को लेकर सनसनीखेज बातें कीं। बच्चों को खाने वाला दावा भी इन्हीं अफवाहों वाली कहानियों का हिस्सा है।
फैक्ट-चेकर्स और मीडिया विश्लेषकों का कहना है कि नरभक्षण से जुड़े शब्दों का उल्लेख होने का मतलब यह नहीं है कि एपस्टीन इसमें शामिल था। ये महज दस्तावेजों में दर्ज संदिग्ध सूचनाएं हैं। सोशल मीडिया पर इन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और गलत निष्कर्ष निकाले गए।
सोशल मीडिया पर फैल रही यह बात कि जेफरी एपस्टीन बच्चों को खाता था, पूरी तरह से झूठी और भ्रामक है। अमेरिकी न्याय विभाग की फाइलों में नरभक्षण का उल्लेख जरूर है,लेकिन एपस्टीन के खिलाफ इस तरह का कोई ठोस सबूत नहीं है। ये दावा झूठा और फर्जी है।
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