Full Moon Supermoon: सर्दियों की लंबी रातों में आसमान का नजारा वैसे ही खास होता है, लेकिन इस बार जनवरी की शुरुआत एक और अद्भुत नजारे से होने जा रही है। 3 जनवरी की शाम को साल का पहला सुपरमून दिखेगा। इस दौरान चांद सामान्य से बड़ा और ज्यादा चमकदार दिखाई देगा।
क्या होता है सुपरमून?
सुपरमून तब होता है जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे नजदीकी बिंदु, यानी पेरिजी, पर होता है और उसी समय पूर्णिमा भी होती है। इस स्थिति में चंद्रमा का पृथ्वी की ओर वाला हिस्सा पूरी तरह रोशन होता है, जिससे वह सामान्य से ज्यादा बड़ा और उजला दिखाई देता है।
भारत में कब और कैसे दिखेगा यह नजारा
दुनियाभर में सुपरमून अपने चरम पर 3 जनवरी को अलग-अलग समय पर पहुंचेगा। भारत में यह नजारा सूर्यास्त के तुरंत बाद देखने को मिलेगा। शाम करीब 5:45 से 6 बजे के बीच चांद उगते ही इसे साफ तौर पर देखा जा सकेगा। इस समय चंद्रमा पूर्ण अवस्था में होगा, जैसा कि NASA के आंकड़ों में बताया गया है।
दुनिया के अन्य हिस्सों में यह सुपरमून न्यूयॉर्क में सुबह 5:30 बजे, लंदन में 10:03 बजे, टोक्यो में शाम 7:30 बजे और सिडनी में रात 9:03 बजे स्थानीय समय के अनुसार नजर आएगा।
मून इल्यूजन का कमाल
जब चांद क्षितिज के पास होता है, तो वह नारंगी-पीले रंग का दिखाई देता है। इसे “मून इल्यूजन” कहा जाता है। यह एक दृश्य भ्रम है, जिसमें नीचे लटका चांद हमें असल से कहीं ज्यादा बड़ा नजर आता है। वातावरण और आंखों के भ्रम का यह मेल सुपरमून को और भी खास बना देता है।
जनवरी की पूर्णिमा को क्यों कहते हैं वुल्फ मून
जनवरी की पूर्णिमा को वुल्फ मून भी कहा जाता है। उत्तरी गोलार्ध की लोककथाओं के मुताबिक, सर्दियों की लंबी रातों में भेड़ियों की पुकार (Howling) से इसका नाम जुड़ा माना जाता है। इसे “यूल के बाद का चांद” भी कहा जाता है।
इस सुपरमून को देखने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं है। खुली जगह और साफ आसमान हो तो नंगी आंखों से भी शानदार नजारा देखा जा सकता है। हालांकि, अगर आप चांद की सतह के गड्ढे और बारीक डिटेल देखना चाहते हैं, तो दूरबीन या बायनॉक्यूलर मददगार हो सकते हैं।