
चलना अक्सर एक्सरसाइज के रूप में नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन यह सक्रिय रहने का सबसे आसान और प्रभावी तरीकों में से एक है। जिन लोगों के पास लंबा जिम सेशन करने या कठिन वर्कआउट के लिए समय नहीं होता, उनके लिए रोजाना चलने की आदत एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। यह हल्की लेकिन असरदार गतिविधि है, जो नियमित रूप से करने पर शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती है।
इसी के फायदे बताते हुए फिटनेस इन्फ्लुएंसर कोर्टनी, जो इंस्टाग्राम पर “Courtney’s Health Corner” नाम से पेज चलाती हैं, ने बताया कि 45 दिनों तक रोज़ 45 मिनट ट्रेडमिल पर चलने से उन्हें क्या अनुभव हुआ। 16 फरवरी को शेयर किए गए एक वीडियो में उन्होंने बताया कि यह छोटी सी आदत उनके फिटनेस रूटीन से कहीं ज़्यादा चीजों को बदलने वाली साबित हुई।
रोज़ 45 मिनट चलने की आदत बनाने से सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि मन में भी सकारात्मक बदलाव आता है। कोर्टनी बताती हैं कि इस साधारण रूटीन को रोजनिभाने से उन्हें जीवन के दूसरे कामों में भी नियमित रहने में मदद मिली।
45 दिनों तक खुद से किया वादा निभाकर उन्होंने खुद को साबित किया कि वह अनुशासित रह सकती हैं। धीरे-धीरे यह आदत प्रेरणा पर निर्भर रहने के बजाय एक नियमित लय का हिस्सा बन गई।
उन्होंने कहा, “हर दिन 45 मिनट की वॉक के लिए खुद को तैयार करना मुझे जीवन के बाकी कामों में भी तैयार रहने में मदद करने लगा। जब मैंने खुद से किया वादा 45 दिनों तक निभाया, तो बाकी चीजें कम मुश्किल लगने लगीं। एक अच्छा फैसला दूसरे अच्छे फैसले को आसान बना देता है। यह प्रेरणा से आगे बढ़कर एक आदत बन गया।”
रोजाना की वॉक ने कोर्टनी को तनाव संभालने में भी काफी मदद की। यह 45 मिनट का समय ऐसा था जो सिर्फ उनका अपना होता था। उस दौरान न कोई जिम्मेदारी होती थी और न ही कोई उनसे कुछ मांगता था।
वह बताती हैं कि अक्सर वह वॉक शुरू करते समय मानसिक रूप से थकी और उलझी हुई महसूस करती थीं, लेकिन खत्म करते-करते खुद को ज्यादा शांत, संतुलित और स्थिर महसूस करती थीं।
उनके शब्दों में, “तनाव को बेहतर तरीके से संभालना – 45 मिनट ऐसा समय जब किसी को मुझसे कुछ नहीं चाहिए होता था। यह वॉक मेरे लिए दबाव कम करने का जरिया बन गई। मैं अक्सर तनाव में वॉक शुरू करती और खत्म करते समय ज्यादा शांत महसूस करती थी। जिंदगी वही रहती थी, लेकिन प्रतिक्रिया ज्यादा शांत हो जाती थी।”
हर दिन चलने से धीरे-धीरे शरीर की सहनशक्ति भी बढ़ती है। कोर्टनी बताती हैं कि जब उन्होंने शुरुआत की थी, तब ट्रेडमिल पर थोड़ा सा ढलान (इंक्लाइन) भी संभालना मुश्किल लगता था। लेकिन अब वह आराम से 5 से 10 प्रतिशत इंक्लाइन पर वर्कआउट कर लेती हैं।
यह दिखाता है कि नियमित चलने से धीरे-धीरे ताकत और स्टैमिना बढ़ता है। उन्होंने कहा, “मेरी सहनशक्ति काफी मजबूत हो गई है। शुरुआत में मैं हल्का सा इंक्लाइन भी नहीं कर पाती थी, लेकिन अब पूरे वर्कआउट के दौरान 5 से 10 प्रतिशत इंक्लाइन पर चल सकती हूं।”
कोर्टनी के अनुसार, वॉक के दौरान दिमाग को सोचने और नए विचार आने का मौका मिलता है। चलते समय दिमाग रोजमर्रा की जिम्मेदारियों और स्क्रीन से दूर रहता है, जिससे नए विचार आसानी से आते हैं।
वह बताती हैं कि एक शिक्षक होने के नाते उन्हें वॉक के दौरान अक्सर पढ़ाने के नए तरीके, लेखन के विषय और समस्याओं के समाधान के अच्छे विचार मिलते हैं। उनके लिए यह वॉक दिमाग को रीसेट करने जैसा होता है।
उन्होंने कहा, “एक शिक्षक के तौर पर वॉक मेरे दिमाग को खुलकर सोचने का मौका देती है। मेरी कई अच्छी लेसन आइडिया, लिखने के विषय और समस्याओं के समाधान तब मिले जब मैं स्क्रीन के सामने नहीं थी। बिना शोर और व्यस्तता के मेरे विचार बेहतर तरीके से जुड़ते हैं। यह मेरे दिमाग को ब्रेक देने जैसा लगता है।”
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)
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