इस बार मोक्षदा एकादशी का व्रत 1 दिसंबर को रखा जा रहा है। इसी दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था। यह एकादशी मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है, इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
साथ ही, कुछ सरल उपाय करने से आप अपने पूर्वजों को भी प्रसन्न कर सकते हैं। इन कर्मों से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
मोक्षदा एकादशी पर करें ये 5 काम
1. पूर्वजों के लिए तर्पण करें: मोक्षदा एकादशी पर पूर्वजों के लिए तर्पण करना बहुत शुभ माना जाता है। इसके लिए आप गंगाजल का उपयोग कर सकते हैं। यदि संभव हो, तो किसी ब्राह्मण से तर्पण और पिंडदान करवाएं। ऐसा करने से पूर्वजों की आत्मा प्रसन्न होती है और आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
2. गीता के इन अध्यायों का पाठ करें: मोक्षदा एकादशी पर भगवद्गीता का पाठ करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से गीता के सातवें, ग्यारहवें और अठारहवें अध्याय का पाठ करने की परंपरा है। माना जाता है कि ये अध्याय मोक्ष और पितृ उद्धार से जुड़े हैं। यदि आप तीनों अध्याय न पढ़ सकें, तो कम से कम इनमें से एक अध्याय अवश्य पढ़ें।
3. दान का महत्व: हिंदू धर्म में दान का बहुत महत्व है। मोक्षदा एकादशी पर पूर्वजों को याद करके दान करने से वे प्रसन्न होते हैं। इस दिन आप ब्राह्मणों को भोजन करा सकते हैं और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या दक्षिणा दे सकते हैं।
4. पूर्वजों के लिए दीपक जलाएं: मोक्षदा एकादशी पर आप अपने पूर्वजों की शांति के लिए दीपक भी अर्पित कर सकते हैं। आप घर के दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं या किसी पवित्र नदी में दीप प्रवाहित करें। ऐसा करने से पितृ दोष दूर होता है और पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है।
5. पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं: पीपल के वृक्ष को पूर्वजों का वास माना गया है। इसलिए मोक्षदा एकादशी के दिन पीपल के नीचे दीपक जलाना और उसकी 11 बार परिक्रमा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे पूर्वज प्रसन्न होते हैं और जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)