Food Divorce: क्या अलग-अलग खाना खाने से कपल्स का रिश्ता हो सकता है ज्यादा खुशहाल?

फूड डिवोर्स एक नया रिलेशनशिप ट्रेंड है, जिसमें कपल्स हर दिन साथ खाना खाने की मजबूरी से बाहर निकलते हैं। दोनों अपनी पसंद और समय के अनुसार अलग खाना खा सकते हैं। इसका मकसद दूरी बढ़ाना नहीं, बल्कि खाना बनाने की जिम्मेदारी, रोज की बहस और तनाव को कम करना है।

Manali Rastogi
अपडेटेड18 Aug 2026, 01:30 PM IST
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फूड डिवोर्स
फूड डिवोर्स

क्या खुशहाल रिश्ते का राज एक-दूसरे के साथ ज्यादा समय बिताने में नहीं, बल्कि कभी-कभी अलग-अलग खाना खाने में छिपा हो सकता है? पहली नजर में यह बात अजीब लग सकती है। आखिर कपल्स को अक्सर साथ खाना खाने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि साथ खाना रिश्ते को मजबूत बनाने वाली छोटी-छोटी आदतों में से एक है।

लेकिन एक नया रिलेशनशिप ट्रेंड इस सोच को चुनौती दे रहा है, जिसे फूड डिवोर्स कहा जा रहा है। और नहीं, इसका मतलब पिज्जा की टॉपिंग को लेकर पार्टनर से रिश्ता तोड़ना नहीं है। इसका मतलब है उस उम्मीद से थोड़ा दूर होना, जिसमें एक ही व्यक्ति से हर दिन घर का खाना प्लान करने, बनाने और परोसने की जिम्मेदारी की जाती है।

क्या है फूड डिवोर्स?

फूड डिवोर्स का इस्तेमाल उन कपल्स और परिवारों के लिए किया जा रहा है, जो डिनर को ऐसी जिम्मेदारी मानना बंद कर देते हैं, जिसे हर दिन एक तय तरीके से साथ मिलकर करना जरूरी है। इसका मतलब हो सकता है कि दोनों पार्टनर अपने लिए अलग-अलग खाना बनाएं, अलग समय पर खाना खाएं या जो व्यक्ति लंबे समय से खाना बनाने की जिम्मेदारी संभाल रहा है, वह हर शाम खाना बनाने से मना कर दे।

कुछ मामलों में कपल्स जब मन हो तब साथ खाना खा सकते हैं। वे बाहर डिनर के लिए जा सकते हैं, वीकेंड पर साथ खाना बना सकते हैं या कुछ खास दिनों में परिवार के साथ खाना खा सकते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि डिनर को हर दिन निभाई जाने वाली जिम्मेदारी नहीं माना जाता।

हाल के समय में इस विचार को इसलिए भी चर्चा मिल रही है क्योंकि लोग घर में खाना बनाने के पीछे होने वाले उस काम पर सवाल उठा रहे हैं, जो अक्सर दिखाई नहीं देता। इसमें यह तय करना कि आज क्या बनेगा, सामान खरीदना, खाना बनाना और उसके बाद सफाई करना तक शामिल है।

जब डिनर रिश्ते के लिए समस्या बन जाए

हर शाम यह पूछना कि आज खाने में क्या बनेगा, सुनने में आसान लगता है। लेकिन जब एक ही व्यक्ति से हर दिन इसका जवाब देने की उम्मीद की जाए, तो यह जिम्मेदारी थकाने वाली हो सकती है।

इसमें सिर्फ खाना बनाना शामिल नहीं है। मील प्लान करना, किराने का सामान लाना, परिवार के हर सदस्य की पसंद याद रखना, बच्चों के खाने को लेकर नखरे संभालना और कभी-कभी अलग-अलग लोगों के लिए अलग खाना बनाना भी इसी जिम्मेदारी का हिस्सा है।

कुछ कपल्स के लिए यह व्यवस्था बिल्कुल ठीक काम करती है। लेकिन कुछ लोगों के लिए यह धीरे-धीरे थकान और तनाव का कारण बन सकती है।

ऐसा ही एक उदाहरण कैथलीन डोनाहो का है। दो बच्चों की मां कैथलीन ने कई साल तक परिवार के लिए डिनर तैयार करने की जिम्मेदारी संभालने के बाद हफ्ते के दिनों में खाना बनाना बंद कर दिया। उन्होंने इस बदलाव को कुकिंग से ब्रेकअप करने जैसा बताया। इसके बाद उनके परिवार ने आसान खाने और ज्यादा लचीली व्यवस्था को अपनाया।

क्या अलग-अलग खाना खाने का मतलब है कि कपल दूर हो रहा है?

जरूरी नहीं। यही इस ट्रेंड की सबसे दिलचस्प बात है। कपल अलग-अलग खाना खा सकते हैं और फिर भी भावनात्मक रूप से एक-दूसरे के करीब रह सकते हैं।

हो सकता है एक व्यक्ति सलाद खाना चाहता हो और दूसरा बिरयानी। एक व्यक्ति शाम 7 बजे खाना खाता हो, जबकि दूसरे की ऑफिस मीटिंग देर तक चलती हो। एक पार्टनर खाना बनाना पसंद करता हो, जबकि दूसरा बचा हुआ खाना खाना पसंद करता हो।

ऐसा कोई नियम नहीं है कि एक स्वस्थ रिश्ते में रहने वाले कपल्स की हर दिन की दिनचर्या एक जैसी ही होनी चाहिए।

दरअसल, रोजमर्रा की जिंदगी से कुछ दबाव कम होने पर कपल्स एक-दूसरे के साथ बिताए समय को ज्यादा अच्छे तरीके से एंजॉय कर सकते हैं। अगर डिनर हर रात खाना बनाने, खाने के समय या पसंद को लेकर बहस की वजह न बने, तो दोनों के पास आराम से बातचीत करने के लिए ज्यादा समय हो सकता है।

हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि अलग-अलग खाना खाने की व्यवस्था दोनों की सहमति से हो। इसे पार्टनर को सजा देने या एक-दूसरे से बचने के तरीके के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

फूड डिवोर्स असल में पसंद और आजादी की बात है

असल में फूड डिवोर्स सिर्फ खाने से जुड़ा ट्रेंड नहीं है। यह अपनी पसंद और आजादी को लेकर है। यह एक आसान सा सवाल उठाता है: क्या मजबूत रिश्ते के लिए कपल्स का हर काम साथ करना जरूरी है?

इसका जवाब है, नहीं। एक स्वस्थ रिश्ते में कुछ चीजें साथ की जा सकती हैं और कुछ चीजों की अपनी अलग दिनचर्या हो सकती है। पार्टनर के अलग-अलग शौक हो सकते हैं, सोने का समय अलग हो सकता है, अलग दोस्त हो सकते हैं और अब अलग डिनर भी हो सकता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि दोनों पार्टनर एक-दूसरे की पसंद और जरूरतों का सम्मान करें और घर की जिम्मेदारियां बराबरी से बांटी जाएं।

कुछ परिवारों में एक पार्टनर हफ्ते में तीन दिन खाना बना सकता है और बाकी दिनों में दूसरा पार्टनर जिम्मेदारी संभाल सकता है। कुछ परिवारों में हर व्यक्ति अपना खाना खुद बना सकता है। वहीं कुछ कपल्स के लिए खाना बनाना सिर्फ वीकेंड की एक्टिविटी हो सकती है, जबकि हफ्ते के बाकी दिनों में बचा हुआ खाना, बाहर का खाना या जल्दी तैयार होने वाला भोजन उनकी पसंद हो सकता है।

आखिरकार, खुशहाल रिश्ता हर काम साथ करने का नाम नहीं है। कभी-कभी एक-दूसरे को अपनी पसंद और सुविधा के हिसाब से जीने की जगह देना भी रिश्ते को बेहतर बना सकता है।

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