
भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में सबसे पहले उनकी पूजा की जाती है। मान्यता है कि गणपति बप्पा की आराधना के बिना कोई भी पूजा पूरी नहीं मानी जाती। गणेश चतुर्थी का पर्व इस साल 27 अगस्त से 6 सितंबर तक मनाया जाएगा। यह त्योहार भगवान गणेश जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। गणेश जी को बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि का देवता माना जाता है।
इन 10 दिनों तक भक्त बड़े उत्साह और भक्ति के साथ गणपति बप्पा की पूजा करते हैं। घरों और पंडालों में सुंदर प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और रोज़ आरती, भजन और पूजा होती है। लोग प्रसाद बांटते हैं और मिलजुलकर इस पर्व को खुशी से मनाते हैं। इस प्रकार, गणेश चतुर्थी न केवल धार्मिक महत्व रखती है बल्कि लोगों को आपसी प्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश भी देती है।
भगवान गणेश की पूजा एक आरती के बिना अधूरी मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि गणेशोत्सव के दौरान इस आरती को करते हैं तो इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। गणेश आरती करने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। व्यापार और कार्यों में सफलता मिलती है। अगर विद्यार्थी सच्चे मन से गणेश जी की आरती करते हैं तो पढ़ाई में ध्यान केंद्रित होता है और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
पान चढ़े, फल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)
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