Gauri Ganesha Chaturthi Kab Hai: खास है गौरी गणेश चतुर्थी का महत्व, जानिए पूजा विधि, नियम तिथि और समय

गौरी गणेश चतुर्थी 2026 माघ शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत से बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मध्याह्न में पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। 

Manali Rastogi
पब्लिश्ड21 Jan 2026, 04:26 PM IST
Gauri Ganesha Chaturthi Kab Hai: खास है गौरी गणेश चतुर्थी का महत्व, जानिए पूजा विधि, नियम तिथि और समय
Gauri Ganesha Chaturthi Kab Hai: खास है गौरी गणेश चतुर्थी का महत्व, जानिए पूजा विधि, नियम तिथि और समय

गौरी गणेश चतुर्थी 2026 भगवान गणेश के गौरी गणेश स्वरूप को समर्पित एक महत्वपूर्ण हिंदू व्रत है। यह व्रत माघ शुक्ल चतुर्थी को रखा जाता है और इसका उल्लेख मुद्गल पुराण व भविष्य पुराण जैसे ग्रंथों में मिलता है।

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मान्यता है कि श्रद्धा और नियम से यह व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। चतुर्थी के दिन मध्याह्न काल में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है, इसलिए पूजा विधि को सही तरीके से करना चाहिए।

गौरी गणेश चतुर्थी 2026: तिथि और समय

  • गौरी गणेश चतुर्थी: गुरुवार, 22 जनवरी 2026
  • चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 11:29 बजे से दोपहर 1:37 बजे तक
  • चंद्र दर्शन वर्जित समय: सुबह 9:22 बजे से रात 9:19 बजे तक
  • चतुर्थी आरंभ: 22 जनवरी 2026, सुबह 2:47 बजे
  • चतुर्थी समाप्त: 23 जनवरी 2026, सुबह 2:28 बजे

गौरी गणेश चतुर्थी का महत्व

यह व्रत बुद्धि, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के देवता भगवान गणेश को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन जप, तप, दान और सच्ची भक्ति करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

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भगवान गणेश की पूजा से जीवन में सफलता मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्रों में इस दिन को गणेश जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। यह भाद्रपद मास में आने वाली गणेश चतुर्थी से अलग माना जाता है।

गौरी गणेश चतुर्थी पूजा विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
  • मिट्टी से बनी भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें।
  • वक्रतुंड गणेश षोडशोपचार मंत्र का जाप करें।
  • भगवान गणेश को मोदक अर्पित करें।
  • “गं स्वाहा” मंत्र का यथासंभव जप करें।
  • चतुर्थी तिथि में मध्याह्न काल के समय चंद्रमा को तीन बार अर्घ्य अर्पित करें।
  • व्रत पूर्ण करने के बाद पंचमी तिथि को तिल के मोदक का सेवन करें।

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चंद्र दर्शन नियम

परंपरा के अनुसार चतुर्थी के दिन निर्धारित समय में चंद्र दर्शन वर्जित माना जाता है। भक्त इस नियम का पालन करते हुए संयम और श्रद्धा बनाए रखते हैं। गौरी गणेश चतुर्थी 2026 केवल एक व्रत नहीं, बल्कि भक्ति, अनुशासन और नए आरंभ का प्रतीक है। सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा करने से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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