Extinction of species: 7,895 प्रजातियों के समूल विनाश के दोषी होंगे हम! यह स्टडी रिपोर्ट सोने नहीं देगी

Oxford University study biodiversity loss: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन के अनुसार, इस सदी के अंत तक दुनिया भर में लगभग 8,000 पशु प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा है। इस महाविनाश का कारण अत्यधिक गर्मी और भूमि उपयोग में बदलाव को माना गया है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड19 Dec 2025, 12:46 PM IST
हजारों प्रजातियों के खात्मे का खतरा (AI Generated Graphic)
हजारों प्रजातियों के खात्मे का खतरा (AI Generated Graphic)(Notebook LM)

Climate Change Effect: जलवायु परिवर्तन और मानव गतिविधियों के चलते पृथ्वी की जैव विविधता पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने खुलासा किया है कि अगर हालात नहीं बदले तो सदी के अंत तक हजारों पशु प्रजातियां विलुप्त हो सकती हैं। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में यह शोध किया गया जिसमें उभयचर (amphibians), पक्षियों, स्तनधारियों (mammals) और सरीसृपों (reptiles) सहित लगभग 30,000 प्रजातियों का विश्लेषण किया गया। यह अध्ययन ग्लोबल चेंज बायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

7,895 प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपनी टीम के साथ मिलकर शोध में पाया कि वर्ष 2100 तक 7,895 कशेरुकी प्रजातियों (vertebrate species) को अत्यधिक गर्मी और जमीन के इस्तेमाल में बदलाव के कारण वैश्विक स्तर पर विलुप्ति का सामना करना पड़ सकता है।

इस शोध के लिए प्रजातियों के उपयुक्त आवासों (habitats) से संबंधित डेटा इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) से लिया गया था। भविष्य में प्रजातियों के आवास प्रकारों के मानचित्र अमेरिका के मैरीलैंड विश्वविद्यालय से प्रबंधित लैंड-यूज हार्मोनाइजेशन 2 (LUH-2) से प्राप्त किए गए थे।

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खतरों के संभावित प्रभावों को समझना जरूरी

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के भूगोल और पर्यावरण स्कूल में पोस्टडॉक्टोरल रिसर्चर रुइट वर्दी ने इस रिसर्च के बारे में बात करते हुए कहा कि यह अध्ययन अलग-अलग खतरों के संभावित प्रभावों पर विचार करने के महत्व को दिखाता है ताकि उनके संभावित असर का बेहतर अनुमान लगाया जा सके। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर जैव विविधता को बचाने और नुकसान को रोकने के लिए संरक्षण और बचाव कार्यों को तुरंत शुरू करना कितना जरूरी है।

52% इलाकों में खराब स्थितियों का सामना करने का खतरा

इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने चार अलग-अलग परिदृश्यों पर विचार किया। अध्ययन के मुताबिक, सबसे बुरे परिदृश्यों के तहत विभिन्न प्रजातियों को अपने फैलाव वाले 52 प्रतिशत इलाकों में खराब स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, सबसे अच्छे परिदृश्यों में प्रजातियों के 10 प्रतिशत इलाकों पर इसका असर पड़ने का अनुमान है।

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ये इलाके हो सकते हैं सबसे ज्यादा प्रभावित

शोध में पाया गया कि जलवायु परिवर्तन और जमीन के इस्तेमाल में बदलाव के संयुक्त असर से सूडान, चाड और नाइजर जैसे साहेल, मध्य पूर्व और ब्राजील जैसे इलाकों में हालात बहुत ज्यादा गंभीर होने की आशंका है।

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