Gopashtami 2025: गोपाष्टमी कल, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और भगवान कृष्ण की गोवर्धन कथा

Gopashtami 2025 Date & Shubh Muhurat: गोपाष्टमी 2025 का पर्व 30 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण और गौमाता को समर्पित है। इस साल रवि और शिववास योग के शुभ संयोग में पूजा का विशेष महत्व रहेगा। जानें गोपाष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त और कथा।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड29 Oct 2025, 01:17 PM IST
30 अक्टूबर को गोपाष्टमी पढ़ें पूजा का शुभ मुहूर्त और कथा
30 अक्टूबर को गोपाष्टमी पढ़ें पूजा का शुभ मुहूर्त और कथा

Gopashtami 2025 Govardhan Katha in Hindi: कार्तिक मास की खुशबू, दीपों की रौनक और भक्ति का मौसम... इन्हीं सबके बीच आता है गोपाष्टमी, एक ऐसा पर्व जो भगवान श्रीकृष्ण और गौमाता की एकता और करुणा का प्रतीक है। यह दिन सिर्फ पूजा का नहीं बल्कि गौसेवा और संरक्षण का भी संदेश देता है।

गोपाष्टमी 2025 की तिथि और मुहूर्त (Gopashtami 2025 Date and Shubh Muhurat)

दरअसल, पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 29 अक्टूबर 2025 को सुबह 9 बजकर 23 मिनट पर होगी। यह तिथि 30 अक्टूबर सुबह 10 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। इसलिए गोपाष्टमी का पर्व 30 अक्टूबर 2025 को पूरे देश में मनाया जाएगा।

गोपाष्टमी कथा (Gopshtami Katha)

कहा जाता है कि बचपन में भगवान श्रीकृष्ण सिर्फ बछड़ों की सेवा करते थे। एक दिन उन्होंने मां यशोदा से कहा कि अब वे गायों की भी सेवा करना चाहते हैं। तब नंद बाबा ने ऋषि शांडिल्य से शुभ मुहूर्त पूछा, और उसी दिन कार्तिक शुक्ल अष्टमी को कृष्ण पहली बार गाय चराने निकले।

मां यशोदा ने बड़े प्यार से उन्हें तैयार किया, मोरपंख का मुकुट पहनाया, लेकिन जब उन्होंने कृष्ण को पादुका पहनाने की कोशिश की, तो बालकृष्ण मुस्कुराकर बोले जब सब गायों और ग्वालों को पादुका मिलेंगी, तभी मैं पहनूंगा। मां यशोदा की आंखें भर आईं, और उसी दिन से यह तिथि गोपाष्टमी कहलाने लगी।

गोपाष्टमी पर श्रीकृष्ण ने कैसे तोड़ा इंद्र का घमंड? पढ़िए पूरी कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब स्वर्ग के राजा इंद्र अपने अहंकार में डूबे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठा लिया था। सात दिनों तक वर्षा में पर्वत को थामे रखने के बाद इंद्र ने अपना अहंकार त्याग दिया।

कहा जाता है कि कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन ही इंद्रदेव ने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी थी, और तभी से इस तिथि को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा।

इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और गौमाता की विशेष पूजा की जाती है। गायों को सजाया जाता है, उन्हें स्नान कराया जाता है और उन्हें मिठाई, फल और हरा चारा अर्पित किया जाता है।

गोपाष्टमी के शुभ योग

इस वर्ष गोपाष्टमी पर रवि योग और शिववास योग का संयोग बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, इन योगों में भगवान श्रीकृष्ण और गौमाता की पूजा करने से सुख, समृद्धि और पारिवारिक सौभाग्य प्राप्त होता है। यह दिन दान, गौसेवा और भक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

दिनभर के शुभ मुहूर्त

सूर्योदय: सुबह 06:32 बजे

सूर्यास्त: शाम 05:37 बजे

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:48 से 05:40 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 से 12:27 बजे तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 01:55 से 02:40 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:37 से 06:03 बजे तक

गोपाष्टमी के दिन कई जगहों पर गौ पूजन यात्रा, कथा वाचन और भजन संकीर्तन का आयोजन किया जाता है। मंदिरों में गौमाता को फूलों से सजाया जाता है, और भक्तजन कृष्ण-गोपाल की आराधना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन गाय की सेवा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पंचांगों और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य सिर्फ आपको जागरूक करना है, मिंट हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है। कृपया कोई निर्णय लेने से पहले अपनी श्रद्धा और विवेक से काम लें।

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