Govardhan Maharaj Aarti lyrics in Hindi: गोवर्धन पूजा के बाद आरती का है विशेष महत्व, यहां हिंदी में पढ़िए संपूर्ण आरती

Govardhan Maharaj ki Hindi Aarti: गोवर्धन पूजा मथुरा-वृंदावन में धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा और आरती की जाती है। यहां हिंदी में पढ़िए पूरी आरती…

Anuj Shrivastava
पब्लिश्ड21 Oct 2025, 03:27 PM IST
गोवर्धन भगवान की आरती
गोवर्धन भगवान की आरती

Govardhan Maharaj Aarti lyrics: दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है। मथुरा-वृंदावन में ये पर्व काफी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन वहां गोवर्धन पर्वत की पूजा होती है। शास्त्रों के अनुसार इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने इंद्रदेव के अहंकार को तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठा लिया था।

इस दिन पूजा के साथ ही गोवर्धन महाराज की आरती करना करने का विशेष महत्व है। ऐसे में अगर आप पूजन के बाद आरती करेंगे, तो ही आपकी गोवर्धन पूजा संपूर्ण मानी जाएगी। अगर आपको आरती याद नहीं हैं, यहां हिंदी में पढ़िए भगवान गोवर्धन की संपूर्ण आरती

गोर्वधन महाराज जी की आरती | Govardhan Maharaj Ji Ki Aarti Lyrics

श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,

तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े,

तोपे चढ़े दूध की धार।

तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।तेरी सात कोस की परिकम्मा,

और चकलेश्वर विश्राम

तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तेरे गले में कण्ठा साज रहेओ,

ठोड़ी पे हीरा लाल।

तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तेरे कानन कुण्डल चमक रहेओ,

तेरी झांकी बनी विशाल।

तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण।

करो भक्त का बेड़ा पार

तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

गोवर्धन महाराज की जय... भगवान कृष्ण की जय... मानसी गंगा की जय... राधा कुंड की जय... कृष्ण कुंड की जय...

शास्त्रों में कहा गया है कि गोवर्धन जी की आरती के बाद तुलसी मां की भी आरती करनी चाहिए। इस दिन तुलसी माता की आरती का करने से महापुण्य की प्राप्ति होती है।

तुलसी माता की आरती (Tulsi Ji Ki Aarti Lyrics)

जय जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता ।

सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता।। - मैय्या जय तुलसी माता।।

सब योगों से ऊपर, सब रोगों से ऊपर।

रज से रक्ष करके, सबकी भव त्राता। -मैय्या जय तुलसी माता।।बटु पुत्री है श्यामा, सूर बल्ली है ग्राम्या।

विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे, सो नर तर जाता। - मैय्या जय तुलसी माता।।

हरि के शीश विराजत, त्रिभुवन से हो वंदित।

पतित जनों की तारिणी, तुम हो विख्याता। -मैय्या जय तुलसी माता।।

लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन में।

मानव लोक तुम्हीं से, सुख-संपति पाता। - मैय्या जय तुलसी माता।।

हरि को तुम अति प्यारी, श्याम वर्ण सुकुमारी। प्रेम अजब है उनका, तुमसे कैसा नाता।

हमारी विपद हरो तुम, कृपा करो माता। मैय्या जय तुलसी माता।।

जय जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता।

सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता॥ - मैय्या जय तुलसी माता।।

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