Ethanol Blended Petrol: अगर आप भी अपनी गाड़ी में एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) यानी एथेनॉल मिला हुआ फ्यूल डलवा रहे हैं, तो पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों ने आपको जरूर परेशान किया होगा। इंटरनेट पर दावा किया जा रहा है कि इस नए फ्यूल से गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं, इंश्योरेंस क्लेम रद्द हो रहे हैं और यहां तक कि पेट्रोल टैंक के पास चींटियां जमा हो रही हैं। इन चौंकाने वाले दावों के बीच अब खुद भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सामने आकर स्थिति साफ की है। सरकार ने इन सभी बातों को पूरी तरह से भ्रामक और बेबुनियाद करार दिया है।
सरकार ने सभी दावों को किया खारिज
मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर हो रहे दावों को खारिज करते हुए कहा कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से किसी भी गाड़ी का इंश्योरेंस क्लेम इनवैलिड नहीं होगा। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाना ग्लोबल लेवल पर स्वीकृत प्रक्रिया है। अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे विकसित देश सालों से इसका सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर रहे हैं। भारतीय ग्राहकों को इस बात को लेकर बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है। यह पूरी तरह सुरक्षित और वैध है।
क्या गन्ने के रस से बनता है एथेनॉल पेट्रोल
सोशल मीडिया पर एक और दावा तेजी से फैल रहा है। दावे में कहा जा रहा है कि पेट्रोल में सीधे गन्ने का रस मिलाया जा रहा है,जिससे गाड़ियां खराब हो सकती हैं। मंत्रालय ने इस दावे पर गहरी चिंता जताते हुए लोगों को आगाह किया है। सरकार ने बताया कि फ्यूल में इस्तेमाल होने वाला एथेनॉल कोई साधारण गन्ने का रस नहीं है। हालांकि इसे बनाने के लिए गन्ने के रस, मोलासेस, टूटे हुए चावल और मक्के जैसे कच्चे माल का इस्तेमाल जरूर होता है। लेकिन ईंधन बनने तक यह एक बेहद जटिल औद्योगिक प्रक्रिया से गुजरता है। इस प्रक्रिया में फर्मेंटेशन और डिस्टिलेशन शामिल हैं।
क्या है चींटियों के वायरल वीडियो का सच?
बता दें कि पिछले दिनों एक वीडियो खूब वायरल हुआ, जिसमें एक गाड़ी के फ्यूल टैंक के पास ढेर सारी चींटियां दिखाई दे रही थीं। दावा किया गया कि E20 पेट्रोल मीठा है, इसलिए चींटियां आ रही हैं। इस पर भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और मंत्रालय ने पूरी सच्चाई सामने रखी है। उन्होंने साफ किया कि एथेनॉल बनाने की डिस्टिलेशन प्रक्रिया में इसके अंदर मौजूद बची-कुची शुगर पूरी तरह से खत्म हो जाती है। इसके अलावा, फ्यूल-ग्रेड एथेनॉल में कुछ खास डिनेचुरेंट्स मिलाए जाते हैं, जिनकी गंध से कीड़े-मकोड़े दूर भागते हैं।