
Sonam Wangchuk: गृह मंत्रालय (MHA) ने आज यानी शनिवार 14 मार्च 2026 को एक बड़ा कदम उठाते हुए लद्दाख के चर्चित पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की रिहाई का ऐलान कर दिया है। करीब 6 महीनों से जेल की सलाखों के पीछे बंद वांगचुक पर लगा 'राष्ट्रीय सुरक्षा कानून' (NSA) हटा लिया गया है। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब लद्दाख के लोग और उनके समर्थक लंबे समय से उनकी रिहाई की मांग कर रहे थे।
आइए जानते हैं कि क्यों उन्हें गिरफ्तार किया गया था और अब सरकार के इस फैसले के पीछे के असली मायने क्या हैं।
पिछले साल सितंबर में लेह में हुई हिंसा के बाद हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। उस वक्त सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया था। मामला इतना गंभीर था कि उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगा दिया गया और उन्हें राजस्थान की जोधपुर जेल भेज दिया गया।
सरकार का तर्क था कि वांगचुक के बयानों से पब्लिक ऑर्डर यानी शांति व्यवस्था खतरे में थी। आज गृह मंत्रालय ने अपना आदेश वापस लेते हुए कहा कि सरकार लद्दाख में शांति और आपसी भरोसे का माहौल बनाना चाहती है।
आज शनिवार को गृह मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाना चाहती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, NSA के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का निर्णय लिया गया है।
सरकार ने यह भी कहा कि वे लद्दाख के हितधारकों और समुदाय के नेताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं ताकि वहां के लोगों की चिंताओं को दूर किया जा सके। सरकार के मुताबिक, लद्दाख में लगातार हो रहे बंद और विरोध प्रदर्शनों की वजह से वहां के पर्यटन, छात्रों की पढ़ाई और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा था।
लेह में राज्य का दर्जा (Statehood) और संविधान की छठी अनुसूची की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक मोड़ ले लिया था। इस हिंसा में 4 लोगों की जान चली गई थी और करीब 90 लोग घायल हुए थे। केंद्र सरकार ने आरोप लगाया था कि वांगचुक ने जेन जी को नेपाल और बांग्लादेश जैसे विरोध प्रदर्शनों के लिए उकसाया था।
सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को उनकी पत्नी गीतांजलि जे आंग्मो ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने अपनी याचिका में इस गिरफ्तारी को अवैध और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया था। गीतांजलि का कहना था कि वांगचुक ने हमेशा हिंसा की निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी यह साफ कहा था कि हिंसा होने पर लद्दाख की पिछले पांच सालों की तपस्या और शांतिपूर्ण संघर्ष बेकार हो जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट आगामी 17 मार्च को वांगचुक के भाषणों के वीडियो देखने के बाद फैसला सुनाने वाला था, लेकिन उससे तीन दिन पहले ही सरकार ने उन्हें रिहा करने का आदेश जारी कर दिया।
वांगचुक की रिहाई को लद्दाख में सार्थक संवाद की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार चाहती है कि वहां फिर से शांति बहाल हो और पर्यटक बेखौफ होकर आ सकें।
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