Gupt Navratri 2026: क्या हैं 10 महाविद्याएं, जानिए गुप्त नवरात्रि की प्राचीन कथा, ये दोनों नवरात्रि से क्यों है अलग

गुप्त नवरात्रि 2026 माघ मास में 19 से 27 जनवरी तक मनाई जा रही है। यह आत्मिक साधना और आंतरिक परिवर्तन का पर्व है। इसमें 10 महाविद्याओं की पूजा, ध्यान, व्रत और एकांत साधना का विशेष महत्व माना जाता है।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड22 Jan 2026, 02:34 PM IST
Gupt Navratri 2026: क्या हैं 10 महाविद्याएं, जानिए गुप्त नवरात्रि की प्राचीन कथा, ये दोनों नवरात्रि से क्यों है अलग
Gupt Navratri 2026: क्या हैं 10 महाविद्याएं, जानिए गुप्त नवरात्रि की प्राचीन कथा, ये दोनों नवरात्रि से क्यों है अलग

इस साल की पहली गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। यह नवरात्रि आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन इसका आयोजन अन्य नवरात्रियों की तरह भव्य और सार्वजनिक नहीं होता। चैत्र और शारदीय नवरात्रि में जहां देवी दुर्गा के नौ रूपों की खुले रूप से पूजा होती है, वहीं गुप्त नवरात्रि अधिक निजी और साधना-केंद्रित होती है।

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गुप्त नवरात्रि माघ और आषाढ़ मास में आती है और इसका संबंध दस महाविद्याओं से माना जाता है। इन महाविद्याओं को देवी शक्ति के गूढ़ और दिव्य स्वरूप माना गया है। गुप्त नवरात्रि के नौ दिन विशेष रूप से उन साधकों के लिए शुभ होते हैं, जो कठिन तप, ध्यान और साधना करते हैं।

गुप्त नवरात्रि 2026 की तिथियां और पूजा

इस वर्ष गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी 2026 से शुरू होकर 27 जनवरी 2026 तक चलेगी। इस दौरान भक्त देवी दुर्गा के सूक्ष्म रूपों की पूजा करते हैं और उपवास, मंत्र जप व अन्य धार्मिक नियमों का पालन करते हैं, जिन्हें अक्सर एकांत में किया जाता है। धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार, गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रूप से पहले दिन गुप्त नवरात्रि कथा का पाठ या श्रवण करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

गुप्त नवरात्रि अन्य नवरात्रियों से अलग क्यों है?

गुप्त नवरात्रि को आत्मिक परिवर्तन का पर्व कहा जाता है। यह विशेष रूप से तांत्रिक साधना, शक्ति उपासना और रहस्यमयी अनुष्ठानों में रुचि रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण है, हालांकि सामान्य गृहस्थ भी इसे सादगी और श्रद्धा से मनाते हैं।

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इस नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है, जिनके नाम काली, तारा, त्रिपुरा सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरा भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला हैं। अन्य नवरात्रियों की तरह इसमें उत्सव और दिखावे पर जोर नहीं होता। यहां संयम, अनुशासन और गहरी साधना को महत्व दिया जाता है। इसी कारण इसे “गुप्त” यानी निजी नवरात्रि कहा जाता है।

गुप्त नवरात्रि से जुड़ी प्राचीन कथा

गुप्त नवरात्रि से जुड़ी कथा बहुत प्राचीन और प्रतीकात्मक मानी जाती है। इसे नवरात्रि के किसी भी दिन सुना जा सकता है, लेकिन मान्यता है कि पहले दिन इसका श्रवण करने से विशेष आध्यात्मिक फल मिलता है।

कथा के अनुसार, एक बार ऋषि श्रृंगी अपने शिष्यों को धर्म उपदेश दे रहे थे। तभी एक स्त्री वहां आई और अपने दुख उनके सामने रखे। उसने बताया कि उसका पति बुरी आदतों में लिप्त है, जिसके कारण वह न तो धार्मिक कार्य कर पाती है और न ही संतों का सत्कार कर सकती है।

इन सबके बावजूद, उस स्त्री की देवी दुर्गा की पूजा करने की तीव्र इच्छा थी और वह अपने परिवार के जीवन में धर्म का स्थान चाहती थी। उसकी सच्ची भावना देखकर ऋषि श्रृंगी ने उसे एक विशेष उपाय बताया।

ऋषि श्रृंगी का उपदेश और गुप्त नवरात्रि की शक्ति

ऋषि ने बताया कि साल में केवल दो ही नहीं, बल्कि चार नवरात्रियां होती हैं—दो प्रसिद्ध और दो गुप्त। गुप्त नवरात्रि में नौ रूपों के बजाय दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। इस समय देवी को “सर्वैश्वर्य कारिणी” कहा जाता है, जो सभी प्रकार की समृद्धि देने वाली हैं।

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ऋषि श्रृंगी ने कहा कि गुप्त नवरात्रि में सच्चे मन से की गई भक्ति जीवन को पूरी तरह बदल सकती है। चाहे व्यक्ति अतीत के कर्मों, गलत आदतों या कठिन परिस्थितियों से घिरा हो, इस समय की गई उपासना से देवी की कृपा प्राप्त की जा सकती है।

भक्ति से बदला जीवन

ऋषि के वचनों पर विश्वास करके उस स्त्री ने पूरे श्रद्धा भाव से गुप्त नवरात्रि का व्रत और पूजन किया। उसकी भक्ति से देवी प्रसन्न हुईं और उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगे। उसके घर में शांति लौट आई, कलह समाप्त हुआ और उसके पति ने भी अपनी बुरी आदतें छोड़ दीं। इस प्रकार गुप्त नवरात्रि को सच्ची आस्था और आंतरिक साधना के माध्यम से जीवन परिवर्तन का पर्व माना जाता है।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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