Guru Nanak Jayanti 2025: गुरुपर्व कब है? जानिए तिथि, शुभ समय, पूर्णिमा तिथि, इतिहास और महत्व

गुरु नानक जयंती, जिसे गुरपुरब कहते हैं, सिख धर्म के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी के जन्म दिवस की स्मृति में मनाई जाती है। इस दिन अरदास, भक्ति गीत और लंगर का आयोजन होता है। यह सत्य, समानता और निःस्वार्थ सेवा का संदेश फैलाता है।

Manali Rastogi
अपडेटेड4 Nov 2025, 11:49 AM IST
Guru Nanak Jayanti 2025: गुरुपर्व कब है? जानिए तिथि, शुभ समय, पूर्णिमा तिथि, इतिहास और महत्व
Guru Nanak Jayanti 2025: गुरुपर्व कब है? जानिए तिथि, शुभ समय, पूर्णिमा तिथि, इतिहास और महत्व

गुरु नानक जयंती, जिसे गुरपुरब या गुरु नानक प्रकाश उत्सव भी कहा जाता है, एक पवित्र और श्रद्धा से मनाया जाने वाला त्योहार है। यह दिन सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु, गुरु नानक देव जी के जन्म दिवस की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु गुरुद्वारों में जाकर अरदास करते हैं और गुरु नानक जी की शिक्षाओं को याद करते हुए भक्ति में लीन हो जाते हैं।

गुरु नानक जयंती कब है?

हर साल गुरु नानक देव जी का जन्म दिवस कार्तिक महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जो आमतौर पर अक्टूबर या नवंबर में आती है। साल 2025 में गुरु नानक जयंती बुधवार, 5 नवंबर को मनाई जाएगी। यह वर्ष गुरु नानक देव जी का 556वां प्रकाश पर्व होगा।

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पूर्णिमा तिथि और शुभ मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 4 नवंबर 2025, रात 10:36 बजे

पूर्णिमा तिथि समाप्त: 5 नवंबर 2025, शाम 6:48 बजे

सूर्योदय: सुबह 6:36 बजे

सूर्यास्त: शाम 5:33 बजे

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 से 5:44 बजे तक

विजया मुहूर्त: दोपहर 1:54 से 2:38 बजे तक

प्रातः संध्या: सुबह 5:18 से 6:36 बजे तक

इतिहास और महत्व

गुरु नानक जयंती सिख धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह दिन गुरु नानक देव जी के जन्म के साथ-साथ उनकी शिक्षाओं को याद करने का अवसर भी देता है। गुरु नानक देव जी ने सत्य, समानता और निःस्वार्थ सेवा का संदेश दिया था।

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त्योहार की शुरुआत दो दिन पहले अखंड पाठ से होती है, जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब का लगातार 48 घंटे तक पाठ किया जाता है। इसके बाद नगर कीर्तन निकाला जाता है, जिसमें पंज प्यारे (पांच प्यारे) आगे चलते हैं। इस शोभायात्रा में भक्तजन भजन-कीर्तन करते हैं और गुरु नानक जी का संदेश लोगों तक पहुंचाते हैं।

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गुरपुरब के दिन सुबह-सुबह प्रभात फेरी निकाली जाती है, जिसमें लोग भक्ति गीत गाते हैं और कथा-कीर्तन करते हैं। इसके बाद गुरुद्वारे में लंगर (सामूहिक भंडारा) का आयोजन होता है, जहाँ सभी लोग मिलकर प्रेम और समानता का संदेश फैलाते हैं।

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