
Hartalika Teej 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है। विवाहित और अविवाहित दोनों ही महिलाएं यह व्रत करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत से विवाहित महिलाओं को दांपत्य सुख मिलता है और अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक है क्योंकि इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत करती हैं यानी बिना भोजन और पानी के पूरा दिन उपवास रखती हैं। इसलिए खासकर वे विवाहित महिलाएं जो पहली बार यह व्रत कर रही हों, उन्हें इसके कुछ नियमों का ध्यान रखना चाहिए।
1. दिन में सोएं नहीं: मान्यता है कि इस दिन दिन के समय सोना शुभ नहीं माना जाता। रात में जागरण करना और भजन-कीर्तन, शिव-पार्वती का नाम जप करना बहुत फलदायी माना गया है। इससे व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
2. सोलह श्रृंगार करें: इस दिन महिलाओं को 16 श्रृंगार (सोलह शृंगार) करना चाहिए। खास ध्यान दें कि माथे पर सिंदूर सुंदर तरीके से लगाया जाए।
3. सही रंगों का चयन करें: हरतालिका तीज के दिन काले रंग के कपड़े और चूड़ियाँ पहनना अशुभ माना जाता है। इस दिन लाल और हरे जैसे शुभ रंगों का प्रयोग करना चाहिए, जो सौभाग्य और मंगल के प्रतीक हैं।
4. पति से विवाद न करें: व्रत के दौरान पति-पत्नी के बीच झगड़ा या बहस करना अशुभ माना जाता है। इससे व्रत का फल कम हो जाता है और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इसलिए घर का वातावरण प्रेम और सकारात्मकता से भरा होना चाहिए।
5. मासिक धर्म के समय क्या करें: अगर महिला इस दिन मासिक धर्म में हो, तो वह मन से संकल्प लेकर व्रत कर सकती है। इसका अर्थ है कि ध्यान, मंत्र जप और मन से पूजा करें लेकिन पूजन सामग्री को स्पर्श न करें।
यह व्रत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत पवित्र माना जाता है। यह अवसर पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाता है और आपसी विश्वास, प्रेम व समर्पण बढ़ाता है। साथ ही महिलाओं के लिए यह व्रत आत्मबल बढ़ाने, आध्यात्मिक उन्नति करने और भगवान शिव व माता पार्वती की कृपा पाने का एक श्रेष्ठ अवसर है।
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