
Heatwave: मार्च का महीना शुरू होते ही भारत में लोग पसीना बहाने लगे हैं। इस साल भारत के कई हिस्सों में पहले से ही तापमान नॉर्मल से 8 से 13 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो गया है। मुंबई में 10 मार्च को तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। दिल्ली में 7 मार्च को तापमान 35.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह पिछले 50 सालों में मार्च के पहले हफ्ते का सबसे गर्म दिन रहा। यही नहीं, दिल्ली में बुधवार यानी 11 मार्च का अधिकतम तापमान 36.8 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जो सामान्य से 8.4 डिग्री ज्यादा है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर मार्च के महीने में इतनी ज्यादा गर्मी क्यों पड़ रही है। आइये विस्तार से जानते हैं।
फर्स्टपोस्ट में छपी खबर के मुताबिक, मुंबई के सांताक्रूज़ में मंगलवार को तापमान 40 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो नॉर्मल से 7.6 डिग्री ज़्यादा है। डेटा से पता चलता है कि 28 मार्च, 2021 के बाद से यह शहर में मार्च का सबसे गर्म दिन था, जब सांताक्रूज़ में मैक्सिमम टेम्परेचर 40.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। मुंबई के कुछ इलाकों में भी तापमान 40 के पार चला गया।
इसमें मुंबई के राम मंदिर इलाके में 42.4 डिग्री सेल्सियस, विक्रोली में 41.6 डिग्री सेल्सियस और भायखला में 40 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। गर्मी के इस तेवर को देखते हुए मौसम विभाग ने मुंबई, ठाणे और पालघर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया था। इसमें कुछ जगहों पर हीटवेव से लेकर गंभीर हीटवेव (Severe Heatwave) का अनुमान लगाया गया।
मौसम विभाग ने बढ़ते तापमान को देखते हुए कई हिस्सों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि एंटीसायक्लोन सिस्टम की वजह से मौजूदा भीषण गर्मी पड़ रही है। मुंबई के मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के वैज्ञानिकों का कहना है, ऐसा सिस्टम तब बनता है जब समुद्री हवाएं धीमी हो जाती हैं। ऐसे में तापमान में अचानक बढ़ोतरी हो जाती है।
IMD मुंबई की साइंटिस्ट सुषमा नायर ने मिड-डे के साथ बातचीत करते हुए कहा कि गुजरात और उसके आस-पास के इलाकों में एक एंटीसाइक्लोनिक सर्कुलेशन है, जिससे इस इलाके में शुष्क पूर्वी हवाएं चल रही हैं। इससे समुद्री हवा रुक जाती है, जो आम तौर पर तटीय शहरों के तापमान को कंट्रोल करती है। इसलिए, ज़्यादा से ज़्यादा तापमान बढ़ जाता है। तापमान का असर डालने वाला वेस्टर्न डिस्टर्बेंस या दूसरा सिस्टम नहीं है। यह सिर्फ और सिर्फ एंटी-साइक्लोन सिस्टम है।
भारत के उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में फरवरी के ठंडे दिनों के बाद मार्च में असामान्य रूप से भीषण गर्मी पड़ रही है। सामान्य से आठ डिग्री अधिक तापमान के साथ, ये क्षेत्र लू की चपेट में हैं। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री अधिक होने पर लू की घोषणा की जाती है। भीषण लू तब मानी जाती है जब पारा 6.5 डिग्री से ऊपर चला जाता है। मौसम विभाग ने मार्च से मई 2026 तक भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक अधिकतम तापमान के लिए पहले ही अलर्ट जारी कर दिया है। चेतावनी दी गई कि कई राज्यों में भीषण गर्मी पड़ सकती है।
दिल्ली में 7 मार्च को पारा 35.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। दिल्ली में पिछले पांच दशकों में मार्च के पहले हफ़्ते का यह सबसे गर्म दिन रहा। पड़ोसी पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी इस महीने बहुत ज़्यादा गर्मी पड़ रही है। राजस्थान के पिलानी में 40.2 डिग्री दर्ज किया गया। गुजरात में भी 41 डिग्री तक तापमान पहुंच गया है। हीट वेव (लू) का अलर्ट जारी है।
अगले कुछ दिनों में पहाड़ों में और बारिश-बर्फबारी हो सकती है। 14 मार्च के बाद एक और पश्चिमी विक्षोभ आने वाला है। लेकिन मैदानों में गर्मी बनी रहेगी। अप्रैल-मई में और तेज गर्मी पड़ने की आशंका जताई गई है। इससे पता चलता है कि मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। क्लाइमेट चेंज के साथ-साथ प्राकृतिक कारण भी हैं, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग इसे और खराब बना रही है।
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