Herbal Cigarette: भारत में आजकल हर्बल सिगरेट का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। जड़ी-बूटियों से बनी ये सिगरेट अब केवल लत छोड़ने का साधन नहीं रह गई हैं, बल्कि एक नए 'आयुर्वेदिक लाइफस्टाइल' प्रोडक्ट के तौर पर बाजार में अपनी जगह बना रही हैं। पिछले एक दशक में इनका बाजार 100 से 200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स से लेकर क्विक कॉमर्स ऐप्स तक पर इनकी मांग काफी ज्यादा है। लेकिन सवाल है कि क्या हर्बल सिगरेट सच में नुकसानदायक नहीं है?
आयुर्वेद और ‘धूमपान’ का पुराना कनेक्शन
हर्बल सिगरेट के पीछे आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों का तर्क दिया जाता है। चरक संहिता जैसे ग्रंथों में 'धूमपान' का जिक्र मिलता है। इसके अनुसार, जड़ी-बूटियों के औषधीय धुएं से सांस की बीमारियों, सर्दी-जुकाम और सिर के भारीपन जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। यहां तक कि इसे बालों के झड़ने की समस्या रोकने के लिए भी उपयोगी बताया गया है। इसी आधार पर कई छोटे ब्रांड्स ने अपनी सिगरेट को आयुष मंत्रालय के तहत आयुर्वेदिक दवा के रूप में रजिस्टर कराया है।
भांग का बढ़ता प्रभाव और नया मार्केट
हर्बल सिगरेट की लोकप्रियता की एक बड़ी वजह इसमें इस्तेमाल होने वाला भांग का पौधा भी है। आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा प्रणालियों में भांग के कुछ हिस्सों को औषधि माना गया है। बाजार में मौजूद कई उत्पाद भांग पर आधारित हैं। हालांकि सभी उत्पाद नशीले नहीं होते, फिर भी ये ऐसे ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं जो दर्द, चिंता या अवसाद से राहत पाना चाहते हैं।
रोलिंग पेपर से लेकर मेडिकल एटमाइजर तक
कंपनियां अब ग्राहकों को रिझाने के लिए नए-नए तरीके अपना रही हैं। बाजार में अब स्मोकिंग मिक्स और रोलिंग पेपर के साथ-साथ 'मेडिकल एटमाइजर' भी उपलब्ध हैं। ऑर्गेनिक स्मोक्स जैसे ब्रांड मेडिकल डिवाइस के नाम पर इन्हें बेच रहे हैं। खास बात यह है कि जहां 2019 से भारत में वेप्स (Vapes) पर बैन है, वहीं ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत रजिस्टर आयुर्वेदिक उत्पादों को इसमें छूट मिली हुई है।
तंबाकू सिगरेट होगी महंगी, बढ़ेगा हर्बल का जोर
आने वाले दिनों में तंबाकू वाली सिगरेट पीना और भी महंगा होने वाला है। 1 फरवरी से सभी तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी और सेस के साथ 40% का जीएसटी लगेगा। ऐसे में कंपनियां मान रही हैं कि महंगे तंबाकू के विकल्प के रूप में लोग हर्बल विकल्पों की तरफ और ज्यादा आकर्षित होंगे।
क्या ये आयुर्वेदिक सिगरेट सच में सुरक्षित हैं?
आयुर्वेदिक ग्रंथों में भले ही धुएं के फायदे बताए गए हों, लेकिन आधुनिक डॉक्टर किसी भी तरह के धूम्रपान को सही नहीं मानते। पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अमित कुमार मंडल के मुताबिक, किसी भी चीज को जलाने पर टार और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं। यह धुंआ फेफड़ों और श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है, चाहे वह जड़ी-बूटियों का ही क्यों न हो।
मंडल, पंचकुला के पारस हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी और क्रिटिकल केयर के वरिष्ठ निदेशक हैं। उन्होंने कहा, ‘हर्बल सिगरेट में भी कुछ जलता ही है। इस कारण टार, कार्बन मोनोऑक्साइड, जलन पैदा करने वाले पदार्थ, कण पदार्थ, पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक यौगिक जैसे जहरीले अपशिष्ट उत्पन्न होते हैं। यही श्वसन पथ को समान नुकसान पहुंचा सकते हैं।’
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