
मुंबई के केईएम अस्पताल ने 'स्टैंड-अप' कॉमेडियन प्रणीत मोरे के शो के दौरान पुरुषों के मृत शरीर के बारे में एमबीबीएस छात्रा सेजल पवार की टिप्पणियों की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया है। अस्पताल के डीन डॉ. हरीश एम. पाठक ने शुक्रवार को कहा कि संबंधित टिप्पणियां अस्वीकार्य हैं।
महाराष्ट्र साइबर पुलिस द्वारा मोरे, वेब डेवलपर हिमांशु जांगड़ा और अन्य लोगों के खिलाफ सोशल मीडिया पर 'अश्लील और आपत्तिजनक' चीजें फैलाने का मामला दर्ज किए जाने के बाद केईएम अस्पताल ने कहा कि जांच समिति अगले कुछ दिन में अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है। हरियाणा के गुरुग्राम में एक कॉमेडी शो के दौरान की गई टिप्पणियों को लेकर मोरे और जांगड़ा विवादों में घिर गए हैं। इन टिप्पणियों में कथित तौर पर किसी महिला के साथ जबरदस्ती और बिना उसकी मर्जी के किए गए व्यवहार को सही ठहराया गया था। हिमांशु को उसकी कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया।
इसी शो की एक और क्लिप में पवार को मेडिकल पढ़ाई के लिए इस्तेमाल होने वाले पुरुषों के मृत शरीर के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणी करते हुए देखा गया। अधिकारियों ने इसे मृतकों की गरिमा के प्रति बेहद अपमानजनक बताया। बाद में पवार ने अपनी टिप्पणियों के लिए माफी मांग ली थी। सोशल मीडिया पर पुरुषों के शवों के बारे में एमबीबीएस छात्रा की टिप्पणियों से बड़े पैमाने पर आक्रोश फैलने के बाद, केईएम अस्पताल प्रबंधन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की। हालांकि, विवाद होने पर सेजल ने एक वीडियो बनाकर माफी मांगी है।
जांच समिति में स्नातक हॉस्टल की वार्डन और बायोकेमिस्ट्री विभाग की प्रमुख डॉ. अनीता चालक और मेडिसिन विभाग की सहायक प्रोफेसर एवं केईएम अस्पताल का सोशल मीडिया संबंधी कामकाज संभालने वाली डॉ. श्रद्धा मोरे शामिल हैं। शुक्रवार को, अस्पताल के डीन पाठक ने बताया कि नगर निकाय द्वारा संचालित इस चिकित्सा प्रतिष्ठान को सोशल मीडिया पर 'वायरल' एक वीडियो के बारे में जानकारी मिली थी, जिसमें अस्पताल की एक छात्रा (सेजल पवार) पुरुषों के शवों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करती दिखती है।
उन्होंने कहा, 'यह (टिप्पणी) बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। हम मृतकों के सम्मान को लेकर बहुत संवेदनशील हैं, खासकर तब जब कोई चिकित्सा शिक्षा के लिए बहुत भावुक होकर अपना शरीर दान करता है।' पाठक ने कहा कि दो सदस्यीय समिति की रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। समिति राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के सोशल मीडिया संबंधी दिशा-निर्देशों के आधार पर इस मामले की जांच कर रही है।
इस बीच, 'केईएम महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स' ने एक बयान में कहा कि मौजूदा विवाद में शामिल छात्रा स्नातक छात्रा है और वह एसोसिएशन की सदस्य नहीं है। एसोसिएशन ने कहा, 'फिर भी, केईएम मेडिकल समुदाय के सदस्य होने के नाते, हमारा मानना है कि इस घटना से जुड़ी चिंताओं पर ध्यान देना जरूरी है। एसोसिएशन पेशेवर एवं नैतिक व्यवहार और शरीर दान करने वाले उन व्यक्तियों के प्रति सम्मान के उच्चतम मानकों को बनाए रखती है; जिनका मेडिकल शिक्षा में अमूल्य एवं नि:स्वार्थ योगदान है। छात्रा की टिप्पणियां अनुचित हैं, वे चिकित्सा पेशेवरों से अपेक्षित मूल्यों को नहीं दर्शातीं।'
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