Holika Dahan 2026: चंद्र ग्रहण के बीच कब और कैसे मनाएं होलिका दहन? डिटेल में जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त

होलिका दहन 2026 फाल्गुन पूर्णिमा पर 2 मार्च को मनाया जाएगा, क्योंकि 3 मार्च को चंद्र ग्रहण है। शुभ मुहूर्त शाम 6:20 से रात 12 बजे तक रहेगा। यह पर्व विष्णु द्वारा भक्त प्रह्लाद की रक्षा की याद में मनाया जाता है। रंगों वाली होली 4 मार्च को खेली जाएगी।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड2 Mar 2026, 06:48 AM IST
होलिका दहन
होलिका दहन

होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। यह पवित्र त्योहार फाल्गुन महीने की पूर्णिमा की रात मनाया जाता है। इसे छोटी होली भी कहा जाता है। इस दिन लोग मिलकर होलिका की अग्नि जलाते हैं, पूजा करते हैं और उसकी परिक्रमा करते हैं।

होलिका दहन की कथा भगवान विष्णु और उनके भक्त प्रह्लाद से जुड़ी है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद को उसकी बुरी बुआ होलिका से बचाया था। होलिका दहन के अगले दिन धुलेंडी यानी रंगों वाली होली खेली जाती है।

चंद्र ग्रहण के कारण कब मनाएं छोटी होली?

आमतौर पर होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा के दिन किया जाता है। लेकिन साल 2026 में इसी दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है, इसलिए लोगों के मन में सवाल है कि होलिका दहन 2 मार्च को करें या 3 मार्च को?

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साल 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि 2 मार्च शाम 5:55 बजे शुरू होगी और 3 मार्च शाम 5:07 बजे तक रहेगी। 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा, जो भारत में दिखाई देगा। ग्रहण के दिन पूजा-पाठ नहीं किया जाता। इसलिए होलिका दहन 2 मार्च 2026 को ही किया जाएगा। ग्रहण के कारण रंगों वाली होली 4 मार्च (बुधवार) को पूरे देश में मनाई जाएगी।

शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार 2 मार्च 2026 को होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6:20 बजे से रात 12 बजे तक है।

जानिए महत्व और परंपराएं

शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में करना सबसे अच्छा माना जाता है। इस दिन पवित्र अग्नि जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया जाता है। मान्यता है कि अपनी परेशानियों को इस अग्नि में समर्पित करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है। हर साल फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन धूमधाम से होली खेली जाती है।

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उत्तर भारत में विवाहित महिलाएं “ठंडी होली” नाम से एक विशेष परंपरा निभाती हैं। वे अपने परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा के लिए व्रत रखती हैं और पूजा करती हैं। महिलाएं होलिका की अग्नि में जौ की बालियां भूनकर घर लाती हैं, जिसे शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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