
लंबे समय तक धूम्रपान करने के बाद उसे छोड़ना किसी के लिए भी सबसे मुश्किल चुनौतियों में से एक हो सकता है। कई लोगों के लिए सिगरेट सिर्फ एक लत नहीं होती, बल्कि यह उनकी रोज़मर्रा की आदतों, तनाव से राहत और सामाजिक जीवन का हिस्सा बन जाती है। इसलिए इसे छोड़ना लगभग असंभव सा लगता है। अभिनेता अरशद वारसी ने हाल ही में बताया कि उन्होंने 35 साल तक सिगरेट पीने के बाद सिर्फ एक हफ्ते में इसे छोड़ दिया।
20 फरवरी को पिंकविला को दिए एक इंटरव्यू में अरशद वारसी ने कहा, “कोई भी समझदार व्यक्ति कहेगा कि भला एक ऐप से सिगरेट कैसे छोड़ी जा सकती है। मैं पिछले 35 साल से स्मोकिंग कर रहा था। मुझे लगता था कि मैं इसे कभी नहीं छोड़ पाऊंगा। लेकिन मैं सिगरेट छोड़ने के लिए इतना परेशान हो गया था कि मैंने इसे आजमाने का फैसला किया। मैं कसम खाकर कहता हूं कि मैंने एक हफ्ते में बिना किसी साइड इफेक्ट के सिगरेट छोड़ दी।”
उन्होंने बताया कि जिस टूल का उन्होंने इस्तेमाल किया, उसने उनके अवचेतन मन को दोबारा तैयार करने में मदद की। उन्होंने कहा, “यह आपके अवचेतन दिमाग को बदलने जैसा काम करता है। यह एक तरह का रिमाइंडर है, जैसे मैंने चाय पी है और अब मुझे सिगरेट चाहिए। सातवें दिन यह आपको आखिरी सिगरेट पीने के लिए कहता है।”
वारसी ने याद करते हुए कहा, “मेरे पास मार्लबोरो का पूरा पैकेट था और मुझे पूरा यकीन था कि यह काम नहीं करेगा। मैंने आखिरी सिगरेट पी, पैकेट फेंक दिया और उसके बाद से मैंने सिगरेट को हाथ भी नहीं लगाया। दो दिन बाद हमारे घर पर एक पार्टी थी, जहां सभी लोग स्मोकिंग कर रहे थे, लेकिन मुझे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ा।”
उनका अनुभव यह दिखाता है कि लंबे समय से चली आ रही आदतों से छुटकारा पाने में व्यवहार में बदलाव और सही सोच कितनी अहम भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही यह भी बताता है कि किसी भी लत को छोड़ने के लिए मजबूत इरादा, लगातार प्रयास और मानसिक दृढ़ता जरूरी होती है।
2024 में हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में गुरुग्राम के सीके बिड़ला हॉस्पिटल में क्रिटिकल केयर और पल्मोनोलॉजी विभाग के प्रमुख कुलदीप कुमार ग्रोवर ने बताया कि धूम्रपान छोड़ने के बाद शरीर को जल्दी ही कई फायदे मिलने लगते हैं।
उन्होंने कहा, “आखिरी सिगरेट पीने के 12 घंटे के भीतर ही खून में कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर सामान्य होने लगता है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर हो जाता है और शरीर खुद को ठीक करने की प्रक्रिया शुरू कर देता है। एक साल के भीतर हार्ट अटैक का खतरा काफी कम हो जाता है। समय के साथ इसके फायदे और बढ़ते जाते हैं। 2 से 5 साल में स्ट्रोक का खतरा एक गैर धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के बराबर हो सकता है और 10 साल बाद फेफड़ों के कैंसर से मृत्यु का खतरा आधा रह जाता है।”
डॉ. ग्रोवर ने सिगरेट छोड़ने के लिए कुछ आसान तरीके भी बताए। उन्होंने कहा कि धीरे धीरे सिगरेट की मात्रा कम करें, उन चीजों से दूर रहें जो स्मोकिंग की इच्छा बढ़ाती हैं और जरूरत पड़े तो निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी जैसे पैच या गम का सहारा लें। इसके अलावा तनाव को कम करने के लिए एक्सरसाइज, मेडिटेशन या किसी शौक को अपनाएं। फेफड़ों की सेहत सुधारने के लिए योग, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन और गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज भी फायदेमंद हो सकती हैं।
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