Bhai Dooj 2025: भाई नहीं है तो कैसे मनाएं भाई दूज? यहां जानिए अन्य तरीके

भाई दूज भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक है, जो कार्तिक माह की द्वितीया को मनाया जाता है। बहनें भाइयों का तिलक करती हैं और उपहार देती हैं। बिना भाई के, महिलाएं 'बहन दूज' मनाकर रिश्ते को मजबूत कर सकती हैं।

Manali Rastogi
अपडेटेड22 Oct 2025, 02:20 PM IST
Bhai Dooj 2025: भाई नहीं है तो कैसे मनाएं भाई दूज? यहां जानिए अन्य तरीके
Bhai Dooj 2025: भाई नहीं है तो कैसे मनाएं भाई दूज? यहां जानिए अन्य तरीके

भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के प्यार भरे रिश्ते का प्रतीक है। यह दिन कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस साल, भाई दूज 23 अक्टूबर 2025 को है, जो दीपावली के पांच दिन के उत्सव का सुखद समापन करता है।

इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं, उनकी आरती करती हैं और उनके लंबे जीवन व समृद्धि की कामना करती हैं। भाई भी अपनी बहनों को उपहार देते हैं और जीवनभर उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं।

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लेकिन अगर किसी के पास भाई न हो तो क्या करें? भाई दूज की असली खूबसूरती सिर्फ रिवाजों में नहीं, बल्कि प्रेम, स्नेह और सम्मान की भावना में है जिसे कई अलग-अलग तरीकों से मनाया जा सकता है।

बहन के साथ मनाएं

अगर आपका कोई भाई नहीं है, तो चिंता की बात नहीं। अब कई महिलाएं ‘भाई दूज’ को ‘बहन दूज’ के रूप में मनाती हैं, जहां वे एक-दूसरे को तिलक लगाती हैं और जीवन के हर पड़ाव में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने का वचन देती हैं।

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यह बहनापा मनाने का बहुत सुंदर तरीका है। आप एक-दूसरे को उपहार दे सकती हैं, साथ में खास भोजन बना सकती हैं या दिन को साथ बिताकर अपने रिश्ते को और मजबूत बना सकती हैं।

चचेरे भाइयों या दोस्तों के साथ मनाएं

परिवार सिर्फ खून के रिश्तों से नहीं बनता। अगर आपके ऐसे कज़िन, दोस्त या सहकर्मी हैं जो हमेशा आपके साथ रहे हैं, तो आप उन्हें भी भाई दूज का तिलक लगाकर अपने प्यार और आभार का इज़हार कर सकती हैं।

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भारत के कई हिस्सों में महिलाएं अपने कज़िन या पारिवारिक दोस्तों के साथ भी भाई दूज का पर्व मनाती हैं। असली बात भाव की है और वो है एक-दूसरे की खुशी और सुरक्षा की कामना करना।

चंद्रदेव या भगवान कृष्ण की पूजा करें

हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बहनें चंद्रदेव को अपना भाई मानकर उनकी पूजा करती हैं। वे आरती करती हैं, तिलक लगाती हैं और उनके दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। कुछ जगहों पर बहनें भगवान यमराज या भगवान कृष्ण को अपना भाई मानकर उनकी पूजा करती हैं और उन्हें भोग लगाती हैं। यह परंपरा प्रेम, कृतज्ञता और भक्ति की भावना को जीवित रखती है, भले ही कोई सगा भाई न हो।

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भगवान चित्रगुप्त या सूर्यदेव की आराधना करें

यदि आप त्योहार का धार्मिक महत्व बनाए रखना चाहती हैं, तो आप भगवान चित्रगुप्त की पूजा कर सकती हैं, जिनका जन्मोत्सव भाई दूज के दिन ही मनाया जाता है।

उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में जिन बहनों के भाई नहीं होते, वे भगवान चित्रगुप्त की पूजा करके परिवार की भलाई और बुद्धि की कामना करती हैं। आप सूर्योदय के समय सूर्यदेव को जल अर्पित करके भी इस दिन का शुभारंभ कर सकती हैं।

दूर रहने वाले भाइयों संग वर्चुअल रूप में मनाएं

अगर आपका भाई किसी दूसरे शहर या देश में रहता है, तो आप वीडियो कॉल के ज़रिए भी भाई दूज मना सकती हैं। पूजा की थाली सजाएं, दीया जलाएं और स्क्रीन पर भाई को तिलक लगाएं। आजकल कई परिवार ऑनलाइन ही भाई दूज मना रहे हैं। आप वीडियो संदेश, हस्तलिखित पत्र या डिजिटल गिफ्ट भी भेज सकती हैं।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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