आदित्य धर की फिल्म धुरंधर में दिखाया गया दूध सोडा वाला सीन सिर्फ एक छोटी सी बात नहीं है। यह फिल्म के एक अहम हिस्से को जोड़ता है। इस सीन में गौरव गेरा मोहम्मद आलम के किरदार में नजर आते हैं, जो कराची के लियारी इलाके के मुख्य बाजार में एक साधारण सा जूस स्टॉल चलाते हैं। ऊपर से देखने पर यह सिर्फ गर्मी से राहत पाने आए लोगों की एक आम दुकान लगती है।
लेकिन असल में यह दुकान कुछ और ही है। आलम दरअसल एक भारतीय जासूस है, जो सालों से लियारी में इसी पहचान के साथ रह रहा है। उसका जूस स्टॉल रणवीर सिंह के किरदार हमजा अली मजारी के लिए एक गुप्त मुलाकात की जगह है, जो एक बेहद संवेदनशील मिशन पर वहां पहुंचता है। यहीं दूध सोडा के गिलासों के बीच जरूरी जानकारी दी जाती है, योजनाएं बनती हैं और सब कुछ आम लोगों की नजरों के सामने, लेकिन बिना शक पैदा किए होता है।
दूध सोडा आखिर है क्या?
दूध सोडा बहुत ही आसान सा पेय है। इसमें बस दूध और नींबू वाला सोडा मिलाया जाता है। सुनने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन सही मात्रा में मिलाने पर यह स्वाद में अच्छा लगता है। सोडा की गैस दूध को हल्का बना देती है, जिससे गर्म और उमस भरे मौसम में इसे पीना आसान हो जाता है। यह ऐसा ड्रिंक नहीं है जो दिखावे के लिए बनाया गया हो। ज्यादातर लोग इसे सड़क किनारे ठेलों से जुड़ी यादों के साथ ही याद करते हैं, किसी बड़े मेन्यू से नहीं।
दूध सोडा की पुरानी कहानी
दूध सोडा कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। पैकेट वाले सॉफ्ट ड्रिंक आने से पहले उत्तर भारत और पुराने पंजाब में सोडा की दुकाने आम थीं। दूध आसानी से मिल जाता था और सोडा नया नया आया था, तो दुकानदारों ने प्रयोग शुरू किए। दूध और सोडा का यह मेल लोगों को पसंद आ गया।
इसका विचार इससे भी पहले इंग्लैंड से आया था, जहां कभी दूध और सोडा को सेहत के लिए अच्छा माना जाता था। बंटवारे के बाद पाकिस्तान में दूध सोडा रमजान के दौरान इफ्तार से खास तौर पर जुड़ गया। भारत में यह रोजमर्रा की खाने पीने की आदतों का हिस्सा बना रहा और बिना ज्यादा बदलाव के आज तक टिका रहा।
घर पर दूध सोडा कैसे बनाएं?
- सबसे पहले ठंडा फुल क्रीम दूध लें।
- अगर चाहें तो थोड़ा सा मीठा मिला लें।
- अब धीरे धीरे ठंडा नींबू वाला सोडा डालें और हल्के हाथ से चलाएं।
- ध्यान रखें कि दूध ज्यादा फटे नहीं।
- तुरंत पी लें।
दूध सोडा को खास बनाने के लिए यादों का सहारा नहीं चाहिए। जैसे धुरंधर में दिखाया गया वह स्टॉल, यह भी रोजमर्रा की जिंदगी में घुला मिला रहता है और चुपचाप अपना काम करता है। और कई बार यही सादगी इसे यादगार बना देती है।