पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर ने आज नई राजनीतिक पार्टी का गठन कर दिया। उनकी पार्टी का नाम जनता उन्नयन पार्टी (JUP) रखा गया है। पार्टी गठन के मौके पर हुमायूं कबीर ने कहा कि उनकी राजनीति का केंद्र आम जनता का विकास होगा, इसी सोच के साथ पार्टी का नाम रखा गया है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने वंदे मातरम् के नारे भी लगवाए, जिससे सियासी संदेश साफ दिखाई दिया।
चुनाव चिन्ह से लेकर रणनीति तक का खुलासा
हुमायूं कबीर ने अपनी पार्टी के चुनाव चिन्ह को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने पहली पसंद टेबल और दूसरी पसंद गुलाब के जोड़े को बताया है। हुमायूं ने ऐलान किया कि जनता उन्नयन पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल की सभी 294 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसी भी बड़े दल की बैसाखी पर नहीं चलेगी और पूरी तरह अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कांग्रेस, CPI(M) और AIMIM से किसी भी तरह के गठबंधन से साफ इनकार कर दिया है।
मुर्शिदाबाद पर खास फोकस, दो सीटों से खुद लड़ेंगे
हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले को अपनी रणनीति का केंद्र बताया है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी मुर्शिदाबाद की 10 सीटें जीत सकती है। वर्तमान में जिले की 22 सीटों में से 20 पर TMC और 2 पर BJP का कब्जा है। हुमायूं ने यह भी घोषणा की कि वे खुद बेलडांगा और रेजिनगर से चुनाव मैदान में उतरेंगे। इसके अलावा मुर्शिदाबाद से हिंदू महिला उम्मीदवार मनीषा पांडे और कोलकाता की बालीगंज सीट से निशा चटर्जी को उम्मीदवार बनाए जाने का ऐलान किया।
RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर साधा निशाना
पार्टी गठन से पहले हुमायूं कबीर ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के बंगाल को लेकर दिए बयान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वे मोहन भागवत का सम्मान करते हैं, लेकिन बंगाल में दंगों की आशंका से जुड़े बयान से वे सहमत नहीं हैं। हुमायूं कबीर के सियासी मैदान में उतरने से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जनता उन्नयन पार्टी मुस्लिम बहुल सीटों पर असर डाल सकती है, जिससे बंगाल की चुनावी गणित में बड़ा बदलाव संभव है।