
सड़कों पर और गली-मोहल्लों में बढ़ते कुत्तों के आतंक ने देश के स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव डाल दिया है। 2025 में रेबीज वैक्सीन की मांग में 17% का उछाल केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उन हजारों परिवारों के डर को दर्शाता है जिनके बच्चे या कमाऊ सदस्य रोजाना सड़कों पर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। विशेषकर 'गिग वर्कर्स' और छोटे शहरों के पैदल चलने वाले लोग इस संकट के केंद्र में हैं। अगर खुदा ना खास्ते आप भी कुत्ते की चपेट में आ जाएं तो क्या करें? डॉक्टर ने कुत्ते के काटने के तुरंत बाद उठाए जाने वाले कदम के बारे में बताया है।
आंकड़ों की भाषा में कहें तो 2025 में ARV और इम्यूनोग्लोबुलिन की बिक्री 85 लाख यूनिट तक पहुंच गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 13 लाख यूनिट अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड के बाद लोग स्वास्थ्य को लेकर अधिक जागरूक हुए हैं, लेकिन असली वजह कुत्तों के काटने के मामलों में हुई 76% की भारी वृद्धि है।
2024 में 37 लाख लोग शिकार हुए, और 2025 के शुरुआती रुझान बताते हैं कि यह संकट और गहरा गया है। संसद में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्रालय ने बताया है कि पिछले वर्ष के सिर्फ जनवरी महीने में ही 4,29,664 घटनाएं दर्ज की गई थीं।
मेट्रो शहरों के बड़े अस्पतालों में ठीकठाक स्टॉक है, लेकिन रिपोर्ट ग्रामीण भारत की एक अलग तस्वीर पेश करती है। यूपी, बिहार और राजस्थान के दूर-दराज इलाकों में आज भी मरीजों को एक डोज के लिए मीलों सफर तय करना पड़ रहा है। इस 'वैक्सीन गैप' को भरने के लिए भारत सीरम एंड वैक्सीन (BSV) जैसी कंपनियां वित्त वर्ष 2026 तक अपनी सप्लाई में 15-20% की बढ़ोतरी करने का लक्ष्य रख रही हैं।
भारत सीरम एंड वैक्सीन (BSV) के एमडी और सीईओ संजीव नवनगुल नेबताया कि कंपनी वर्तमान में प्रति माह 1.30 लाख से अधिक एआरवी और रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन खुराक की आपूर्ति करती है। यह सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य प्रणालियों और अस्पतालों को पूरा करता है।
अस्पतालों के ओपीडी (OPD) डेटा के अनुसार, 15 साल से कम उम्र के बच्चे सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। इसकी वजह उनका बाहर खुले में खेलना और जानवरों के प्रति उनकी जिज्ञासा है। इसके अलावा, डिलीवरी बॉयज और रेहड़ी-पटरी वाले लोग, जो रात-बिरात सड़कों पर रहते हैं, कुत्तों के बढ़ते आक्रामक व्यवहार का सामना कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि 5 साल पहले जहां महीने में 10 केस आते थे, अब वहां 35 से अधिक मामले दर्ज हो रहे हैं।
सिर्फ वैक्सीन लगवाना काफी नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 'केयर ऑफ स्टैंडर्ड' का पालन करना जीवन बचा सकता है। कुत्ता काट ले तो घाव को तुरंत बहते नल के पानी के नीचे कम से कम 15 मिनट तक साबुन से धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए डॉक्टर से मिलना चाहिए, क्योंकि गहरे घाव के मामलों में केवल वैक्सीन नहीं, बल्कि 'इम्यूनोग्लोबुलिन' की भी जरूरत होती है जो वायरस को तुरंत बेअसर करने में मदद करता है।
रेबीज से होने वाली मौतों को 2030 तक शून्य करने (Zero by 30) के मिशन के तहत सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने आवारा कुत्तों की नसबंदी और उनके लिए निर्दिष्ट आश्रय स्थल बनाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर नसबंदी कार्यक्रमों की धीमी रफ्तार ने वैक्सीन निर्माताओं पर बोझ बढ़ा दिया है।
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.