Taj Mahal: ताज महल का दीदार करने जा रहे आगरा तो आईटनेरी में इस यमुना किनारे बसे ऑफबीट स्पॉट को भी करें शामिल

आगरा की भीड़-भाड़ से दूर, यमुना नदी के किनारे बसा यह मंदिर नगर शांति, कहानियां और धीमी नदी-सी ज़िंदगी का अनुभव कराता है। ताजमहल की यात्रा के दौरान यह एक आसान और सुकूनभरा पड़ाव है, जो आपकी यात्रा को और खास बना देता है।

Manali Rastogi
अपडेटेड26 Dec 2025, 01:29 PM IST
Taj Mahal: ताज महल का दीदार करने जा रहे आगरा तो आईटनेरी में इस यमुना किनारे बसे ऑफबीट स्पॉट को भी करें शामिल
Taj Mahal: ताज महल का दीदार करने जा रहे आगरा तो आईटनेरी में इस यमुना किनारे बसे ऑफबीट स्पॉट को भी करें शामिल(Ankit M Parashar/ Instagram)

अगर आप आगरा घूमने जा रहे हैं और आपके पास थोड़ा अतिरिक्त समय है, तो एक शांत और अलग अनुभव के लिए बटेश्वर की छोटी यात्रा कर सकते हैं। आगरा से लगभग 70–80 किमी दूर, यमुना नदी के किनारे बसा बटेश्वर गांव स्थित है, जहां प्रसिद्ध बटेश्वर धाम है। यहां इतिहास, मान्यताएं और नदी किनारे का सुकून एक साथ देखने को मिलता है।

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अधिकतर लोग आगरा ताजमहल और किलों के लिए आते हैं, जो वाकई देखने लायक हैं। लेकिन अगर आप भीड़ से दूर कुछ समय शांति में बिताना चाहते हैं, नदी किनारे बैठकर पुराने मंदिरों को निहारना चाहते हैं, तो बटेश्वर एक अच्छा विकल्प है।

बटेश्वर: नदी किनारे बसा ऐतिहासिक मंदिर नगर

बटेश्वर उत्तर प्रदेश का एक पुराना गांव है, जो यमुना नदी के किनारे स्थित है। यहां बटेश्वर धाम में शिव मंदिरों की एक लंबी श्रृंखला है। मान्यता है कि भगवान शिव ने यहां एक बरगद के पेड़ के नीचे विश्राम किया था, इसी कारण इस स्थान का नाम बटेश्वर पड़ा।

कहा जाता है कि पहले यहां करीब 101 शिव मंदिर थे, हालांकि अब इनमें से कुछ ही बचे हैं। ये मंदिर अलग-अलग समय में स्थानीय शासकों द्वारा बनवाए गए थे और इनका महत्व भव्यता से ज्यादा परंपरा और आस्था में है।

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सुबह जल्दी या शाम के समय घाटों पर टहलते हुए माहौल बहुत शांत लगता है। यमुना धीरे-धीरे बहती है, कभी-कभी मंदिरों की घंटियों की आवाज आती है और मंदिर प्रकृति में घुले-मिले से लगते हैं।

बटेश्वर धाम की मान्यताएं और लोककथाएं

बटेश्वर धाम से जुड़ी कई दिलचस्प कथाएं भी हैं। एक मान्यता के अनुसार, मंदिरों के पास यमुना नदी एक मोड़ पर उलटी दिशा में बहती हुई दिखाई देती है, जिससे इस स्थान को रहस्यमय माना जाता है।

पुराने समय की कुछ कहानियां डकैतों से भी जुड़ी हैं। कहा जाता है कि कभी यहां डकैत आया करते थे और बाद में पश्चाताप के रूप में मंदिरों में घंटियां चढ़ाते थे। सच हो या लोककथा, ये कहानियां इस जगह की पहचान का हिस्सा बन गई हैं।

आगरा से बटेश्वर कैसे जाएं?

  • आगरा से बटेश्वर सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है और यात्रा में करीब दो घंटे लगते हैं।
  • आगरा कैंट सबसे नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन है, जहां से टैक्सी और स्थानीय साधन मिल जाते हैं।
  • बटेश्वर में ठहरने की सुविधाएं सीमित हैं, इसलिए अधिकतर लोग आगरा में ही रुककर आधे या पूरे दिन की यात्रा करते हैं।
  • दिन की शुरुआत में जाना बेहतर रहता है, ताकि आप आराम से घाटों पर घूम सकें, मंदिर देख सकें और बिना जल्दबाजी लौट सकें।
  • बटेश्वर भीड़ और दिखावे की जगह नहीं है। यहां शांति, सादगी और समय से जुड़ा एक एहसास मिलता है, जो आगरा यात्रा को खास बना देता है।

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