
सोशल मीडिया मंचों पर बहस-मुबाहिसों का दौर चलता रहता है। हल्के-फुल्के से लेकर बेहद गंभीर मुद्दों तक लोग अपनी राय देते हैं और फिर टिप्पणियां आती हैं। इस तरह विचार-विमर्श का सिलसिला चलता रहता है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को लेकर भी एक से बढ़कर एक दावे किए जाते हैं। इसी क्रम में लेखकर रणदीप सिसोदिया ने नेहरू पर एक लंबा पोस्ट लिखा। उन्होंने कुछ तथ्यों का जिक्र करते हुए आईआटी, एम्स, इसरो जैसे संस्थानों की स्थापना के पीछे नेहरू का हाथ होने की बात नकार दी। इस पोस्ट पर उनकी अनुज धर से भी बातचीत हुई, आइए जानते हैं दोनों ने नेहरू के बारे में क्या चर्चा की।
लेखक रणदीप सिसोदिया ने अपने पोस्ट का हेडिंग ही नेहरू से जुड़े मिथक तोड़ने को लेकर दी। उन्होंने लिखा, 'नेहरू ने IISc, IITs, AIIMS, ISRO बनाया, आइए इस मिथक की पड़ताल करते हैं।' फिर उन्होंने बिंदुवार तरीके से एक-एक बात रखी। रणदीप सिसोदिया लिखते हैं-
1. IISc: स्वामी विवेकानंद ने जमशेदजी टाटा को एक प्रतिष्ठित विज्ञान संस्थान की स्थापना के लिए प्रेरित किया। मैसूर के राजा ने जमीन दी और संसाधन दिए। तब जाकर 1909 में आईसीएससी की स्थापना हुई। नेहरू इस प्रक्रिया में कहीं नहीं थे।
2. IIT: ब्रिटिश वायसराय ने आईआईटीज जैसे उच्च तकनीकी संस्थान की योजना बनाने के लिए 1945 में सरकार समिति का गठन किया था। ब्रिटिश राज के एक सिविल सर्वेंट आर्देशिर दलाल ने इसका आइडिया दिया था। 1947 के बाद बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी रॉय ने नेहरू पर पश्चिम बंगाल में आईआईटी की स्थापना के लिए विधेयक पास करवाने का दबाव डाला। इसके अलावा नेहरू ने एक और काम किया था। उन्होंने आईआईटी खड़गपुर के उद्घाटन का फीता काटा था।
3. AIIMS: ब्रिटिश वायसराय ने 1946 में जो स्वास्थ्य सर्वेक्षण करवाया था, उसी में एम्स का बीज छिपा हुआ था। सर्वेक्षण में पीजी मेडिकल एजुकेशन और रिसर्च के लिए एक बड़े केंद्रीय संस्थान की स्थापना की सिफारिश की गई थी। भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री अमृत कौर ने इस विचार पर काम करना शुरू किया और भारत में एक विश्वस्तरीय चिकित्सा संस्थान का निर्माण उनका सपना बन गया। चूंकि नेहरू सरकार ने इसके लिए फंड नहीं दिए, इसलिए उन्हें स्वीडन, अमेरिका और दुनिया के अन्य हिस्सों से फंड जुटाना पड़ा। उन्होंने अपने शाही खजाने से भी दान दिया और 10 साल में उनका सपना पूरा हो सका। यहां भी नेहरू ने फीता ही काटा।
4. ISRO: रूस ने 1957 में दुनिया का पहला उपग्रह स्पूतनिक लॉन्च किया तब होमी भाभा के समर्थन से विक्रम साराभाई में भी भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम बनाने की उत्सुकता हुई। हालांकि, नेहरू ने फंड देने से साफ-साफ इनकार कर दिया। तब होमी ने टाटा से संपर्क किया। तब जाकर टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में वर्ष 1962 में विक्रम साराभाई के नेतृत्व में अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए भारतीय राष्ट्रीय समिति (INCOSPAR) का गठन हुआ। नेहरू का निधन 1964 में हो गया था जबकि INCOSPAR का गठन 1969 में हुआ।
सिसोदिया का कहना है कि दरअसल प्रधानमंत्री नेहरू के नाम कोई बड़ी उपलब्धि नहीं थी, इस वजह से वामपंथियों ने झूठी कहानियां गढ़ीं ताकि उन्हें विजनरी बताया जा सके। सिसोदिया लिखते हैं, 'भयंकर गलतियों के पहाड़ तले दबे नेहरू के पास बतौर प्रधानमंत्री उपलब्धियां गिनाने को कुछ नहीं था, तब वामपंथी तंत्र ने दिनरात मेहनत करके तथ्यों से छेड़छाड़ की ताकि नेहरू को आईआईएससी, आईआईटीज, एम्स और इसरो जैसे संस्थानों का श्रेय दिया जा सके।'
सिसोदिया के इस पोस्ट पर अनुज धर ने टिप्पणी की। वह लिखते हैं, 'पंडित जी की महानता पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन यह ध्यान रहे कि योजना आयोग की जड़ें कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में सुभाष बोस द्वारा बनाई गई योजना समिति में निहित थीं। आईआईटीज की जड़ें भी ब्रिटिश राज से जुड़ी हैं- खासकर ब्रिटिश रॉयल सोसाइटी के सेक्रेटरी डॉ. एवी हिल से।'
धर से सहमति जताते हुए सिसोदिय ने फिर एक बात कही। उन्होंने लिखा, 'हां, आपकी आखिरी बात पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि स्वतंत्रता से कुछ दशक पहले केंद्रीय विधानसभा का गठन हो गया था और देश की प्रशासनिक व्यवस्था चलाने में भारतीय भागीदारी लेने लगे थे। आईआईटीज की जड़ों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। अगर ब्रिटिश राज ने सचमुच में चाहा होता तो उसने बहुत पहले इसकी शुरुआत कर दी होती।' फिर धर कहते हैं कि दरअसल द्वितीय विश्वयुद्ध कई चीजों के लिए टर्निंग पॉइंट बन गया। डॉ. हिल ने भी उसी वजह से प्रयास किया था।
Disclaimer: यह लेख पूर्णतः सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर हुई चर्चा पर आधारित है। यूजर्स के दावों से मिंट हिंदी सहमत या असहमत नहीं है।
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