Income Tax on Gratuity: जब कोई कर्मचारी किसी कंपनी या सरकारी विभाग में काम करता है और नौकरी छोड़ता है या रिटायर होता है, तो उसे कंपनी की ओर से ‘ग्रेच्युटी’ का पैसा मिलता है। लेकिन सवाल ये आता है कि क्या इस ग्रेच्युटी के पैसे पर टैक्स भी देना पड़ता है? आइए जानते हैं।
ग्रेच्युटी पर टैक्स का नियम क्या है?
आयकर विभाग के मुताबिक, ग्रेच्युटी पर टैक्स तभी लगता है जब वो एक तय सीमा से ज्यादा हो। अभी जो सीमा है, वह 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी पर तो टैक्स नहीं लगेगा। मतलब अगर नौकरी छोड़ने पर आपको 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी मिलती है, तो उस पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा। अगर ग्रैच्युटी 20 लाख से ज्यादा है, तो इस सीमा से ऊपर की राशि पर टैक्स लगेगा।चलिए इसे आसान उदाहरण के साथ समझते हैं।
मान लीजिए, रमेश नाम के एक कर्मचारी ने अपने ऑफिस में 25 लाख रुपये की ग्रेच्युटी मिली।इस मामले में 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी टैक्स-फ्री होगी, लेकिन बाकी 5 लाख रुपये (25 लाख - 20 लाख) पर टैक्स लगेगा। टैक्स ब्याज दर उसके कुल सालाना आय के आधार पर तय होगा।
कब टैक्स लगेगा?
- अगर कर्मचारी अपने नौकरी के दौरान ग्रेच्युटी पाता है, तो वो पूरी तरह टैक्सेबल होती है।
- अगर कर्मचारी रिटायर हो रहा है या नौकरी छोड़ रहा है और उसे ग्रेच्युटी मिल रही है, तब भी 20 लाख रुपये तक की राशि टैक्स से मुक्त रहेगी।
- सरकारी कर्मचारियों और इंडियन आर्मी, नौसेना, वायुसेना के जवानों को भी यह छूट मिलती है।
- निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी समान नियम लागू हैं।
ग्रेच्युटी की गणना कैसे होती है?
ग्रेच्युटी आमतौर पर कर्मचारी की वेतन राशि के आधे महीने के हिसाब से हर पूरे साल के लिए दी जाती है। यदि कोई कर्मचारी 10 साल काम करता है और उसकी वेतन प्रति माह ₹30,000 है, तो उसे ग्रेच्युटी के रूप में मिलेंगे:
15 दिन का वेतन × 10 साल = ग्रेच्युटी रकम
जहां 15 दिन का वेतन = ₹30,000 ÷ 2 = ₹15,000
तो कुल ग्रेच्युटी = ₹15,000 × 10 = ₹1,50,000 (जो टैक्स फ्री होगी क्योंकि ये 20 लाख से कम है)।
ग्रेच्युटी मिलने पर आयकर रिटर्न में इसे सही ढंग से दिखाना आवश्यक होता है। इससे टैक्स विभाग को पता चलता है कि आपको कितनी छूट मिली है और टैक्स कितना देना है। अगर सही जानकारी नहीं दी तो बाद में टैक्स के अतिरिक्त जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।