
भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा पर चौतरफा प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देर रात ट्रेड डील में भारत पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने का ऐलान किया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें धन्यवाद कहा। दूसरी तरफ, विपक्ष में बैठी कांग्रेस पार्टी कह रही है कि इस डील में भारतीय हितों को ताक पर रखकर हर जगह अमेरिका को फायदा पहुंचाया गया है। राजनीति से इतर अन्य क्षेत्र के दिग्गज भी भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अपना नजरिया साझा कर रहे हैं। बिजनेस की दुनिया के दिग्गज और स्तंभकार सुहेल सेठ ने तो राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन्हें बहुत खरी-खोटी सुना दी।
कूटनीतिक मामलों के जानकार और भारतीय थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) में सीनियर फेलो सुशांत सरीन ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर लंबी टिप्पणी की है। उन्होंने डील के विरोध में उठाए जा रहे सवालों पर भी बात की। सरीन ने लिखा, ‘500 अरब डॉलर का अमेरिकी आयात कुछ समय में होगा। 5 सालों में यह लगभग 100 अरब डॉलर सालाना होगा, जो हमारी मौजूदा खरीद का लगभग दोगुना है। तेल, गैस के साथ कुछ और चीजें जोड़ दें तो यह आंकड़ा कोई बड़ी बात नहीं है।’
उन्होंने आगे लिखा, 'बेवकूफ और अनजान पाकिस्तानी कृषि आयात की बात कर रहे हैं। पूरा सेक्टर नहीं खोला गया है। कुछ कृषि उत्पाद बिना भारतीय किसानों को प्रभावित किए इंपोर्ट किए जा सकते हैं और ठीक इसी पर बातचीत हुई है। भारत को इस क्षेत्र के दूसरे देशों की तुलना में कम शुल्क मिला है। जहां तक बात अमेरिका के सामान पर जीरो टैरिफ की है तो अमेरिका और दूसरे देशों के बीच जीरो टैरिफ का ही समझौता है। तो कुल मिलाकर यह हमारे लिए फायदेमंद है।'
सुशांत सरीन यह समझाते हैं कि भारत ने रूस से तेल खरीद घटाने या खत्म करने पर राजी भी हुआ है तो यह कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने लिखा, 'याद रखें कि हमने 2022 से पहले रूसी तेल नहीं खरीदा था और हम इसे इसलिए खरीदते हैं क्योंकि यह डिस्काउंट पर मिल रहा था। रूसी तेल खरीदने का फायदा अभी बहुत कम है। फिर भी, संभावना है कि हम इसे धीरे-धीरे कम करने पर सहमत होंगे और उम्मीद करेंगे कि इस बीच कोई शांति समझौता हो जाए जिससे रूस और उसके तेल उद्योग पर लगे प्रतिबंध हट जाएं। लेकिन भारत सरकार को रूस के साथ संबंधों और टेक्सटाइल, ऑटो, इंजीनियरिंग एवं रत्न उद्योग में काम करने वाले लाखों भारतीयों के कल्याण के बीच संतुलन बनाना होगा। आप भारत सरकार से क्या करवाना चाहेंगे? भू-राजनीतिक अहंकार को खुश करने के लिए भारतीयों की जान और रोजी-रोटी को खतरे में डालना?'
सरीन ने कहा कि ट्रंप ने जो सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है, वही पूरी डील नहीं है। उन्होंने कहा, 'ट्रंप का ट्वीट सिर्फ हेडलाइन न्यूज है। भारत और अमेरिका के बीच जो बातचीत हुई है, वह एक ज्यादा व्यापक समझौता है, इसीलिए इसमें इतना समय लगा। भारत सरकार ने धैर्य रखा, जहां जरूरत थी वहां समझौता किया, और जहां जरूरी था वहां अपनी बात पर अड़ी रही। आखिर में यह अमेरिका और भारत दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित होगा जब तक कि ट्रंप फिर से पलटी ना मार दें। लेकिन यह एक ऐसा जोखिम है जो सभी को उठाना पड़ता है।'
उधर, अंग्रेजी अखबार द हिंदू प्रकाशित करने वाले मीडिया समूह की डायरेक्टर मालिनी पार्थसारथी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका से ट्रेड डील को लेकर भारत की रणनीति काफी सराहनीय है। मालिनी ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुष्टि की है कि वॉशिंगटन के साथ एक डील हुई है जिसके तहत भारत पर पहले लगाए गए 25 प्रतिशत के दंडात्मक अतिरिक्त टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा।'
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे पर मुहर भी नहीं लगाया है कि भारत ने रूसी तेल की खरीद कम करने का वादा किया है। मालिनी ने लिखा, 'राष्ट्रपति ट्रंप की कदम वापसी नरेंद्र मोदी सरकार की मजबूत और समझदारी भरी कूटनीतिक रणनीति की साफ जीत है। पिछले कई महीनों से अमेरिका की आक्रामक रवैये के कारण भारत को जिस गंभीर उकसावे का सामना करना पड़ा, उसे संभालने में प्रधानमंत्री ने अनुकरणीय साहस और दूरदर्शिता दिखाई है।'
उन्होंने कहा कि भारत ने परिस्थितियों का अनुरूप कदम उठाया। मालिनी ने कहा, ‘इस स्थिति के जवाब में दिल्ली ने जो रणनीति अपनाई, वह सराहनीय थी। कई प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए गए, जिसमें यूरोपीय संघ के साथ हाई प्रोफाइल समझौता भी शामिल है। इस समौझते ने दिखा दिया कि भारत एक प्रमुख आर्थिक शक्ति है, जिसे अन्य प्रमुख शक्तियां भी चाहती हैं। इस मुश्किल दौर का सामना करने और आंतरिक विरोध और अलग-थलग पड़ने की संभावना से उकसावे में न आने के लिए मजबूत इरादों की जरूरत थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सहयोगियों को सलाम, जिन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया!’
देश-दुनिया की राजनीति पर नजर रखने वाले और चुनावी विश्लेषक यशवंत देशमुख कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने धैर्य और कूटनीति का शानदार नमूना पेश किया है। उन्होंने कहा, 'आप वैश्विक मामलों और भारत की स्थिति के बारे में कुछ भी सोचते हों, सच तो यह है कि यह बहुत बड़ी बात है। इन मुश्किल समय में पीएम मोदी ने जो जबरदस्त सब्र दिखाया और बहुत विनम्रता से अपनी बात पर टिके रहे, उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कूटनीति का मतलब लचीलेपन के साथ अपने फायदे पर नजर गड़ाए रखना है।'
सी-वोटर के संस्थापक आगे कहते हैं, ‘आने वाले दशकों में भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर उन सभी समझौतों का फायदा उठाएगा जिन पर हमने दस्तखत किए हैं और उन्हें आगे बढ़ाया है। मुझे उम्मीद है कि इन समझौतों से तालमेल बिठाने के लिए नौकरशाही की रुकावटों को दूर करने वाले आर्थिक सुधार भी उसी जोश और समझदारी के साथ जारी रहेंगे।’
बिजनसमैन और सोशलाइट सुहेल सेठ इस मौके पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ऑपरेशन सिंदूर के बाद दिए बयान को याद करते हैं। वो कहते हैं, 'नरेंद्र ने सरेंडर नहीं किया, लेकिन आपने अपनी बचकानी हरकत में अपनी कमजोर बुद्धि का जो थोड़ा-बहुत बचा था, उसे भी सरेंडर कर दिया। कभी-कभी गर्म रहना जरूरी होता है। ठंड का दिमाग पर असर डालने का एक अजीब तरीका होता है। मैगजीन पढ़ते रहिए।'
उधर, कांग्रेस पार्टी ने दावा किया है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील में भारत का नुकसान ही नुकसान है।
ध्यान रहे कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पिछले वर्ष 6-7 मई को पाकिस्तान पर सैन्य हमला किया था। कुछ घंटों के हमले में ही पाकिस्तान पस्त हो गया और उसने भारत से हमला रोकने की गुहार लगाई और भारत ने हमला रोक दिया था। तब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसे अमेरिका के दबाव में लिया गया फैसला बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बहुत ओछी टिप्पणी की था।
उन्होंने कहा कि ट्रंप ने कहा- नरेंदर सरेंडर और मोदी ने सरेंडर कर दिया। सुहेल सेठ ने राहुल के उसी बयान की याद दिलाई है। उन्होंने आखिर में जो कहा- मैगजीन पढ़ते रहिए, उसका संदर्भ सोमवार को लोकसभा में राहुल गांधी के बार-बार एक मैगजीन का जिक्र करने से है। राहुल ने एक मैगजीन में छपी रिपोर्ट के हवाले से यह दावा किया था कि डोकलाम में चीनी सेना के साथ संघर्ष के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फैसला लेने में देरी की।
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