
भारत और यूरोपीय संघ (EU) आज ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा करने जा रहे हैं। इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया है। यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रक्षा, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और वैश्विक नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूती देने का रोडमैप भी तैयार करेगा। आइए जानते हैं 10 प्वाइंट्स में पूरे मामले को विस्तार से।
भारत और EU आज जिस फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति जताने जा रहे हैं, उसे दोनों के रिश्तों में अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक समझौता माना जा रहा है।
इससे टैरिफ, निवेश और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर बड़ा बदलाव आएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं को नई रफ्तार देगा।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन के मुताबिक, इस डील से करीब दो अरब लोगों का साझा बाजार बनेगा।
यह बाजार वैश्विक GDP का लगभग एक-चौथाई हिस्सा कवर करेगा।
इससे भारत और EU दोनों को वैश्विक व्यापार में मजबूत स्थिति मिलेगी।
इस अहम शिखर सम्मेलन की मेजबानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं।
बैठक में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा शामिल होंगे।
यह बैठक भारत–EU रिश्तों को नई रणनीतिक दिशा देने वाली मानी जा रही है।
एंटोनियो कोस्टा और वॉन डेर लेयेन 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि रहे थे।
इससे भारत और EU के बीच बढ़ते भरोसे और नजदीकी का संकेत मिला।
FTA की घोषणा इसी मजबूत रिश्ते का अगला कदम मानी जा रही है।
दोनों पक्ष एक नए सुरक्षा और रक्षा साझेदारी ढांचे की घोषणा कर सकते हैं।
इससे रक्षा क्षेत्र में तकनीकी सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ेगी।
भारत और EU मिलकर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की रणनीति बना सकेंगे।
इस समझौते से भारतीय कंपनियों के लिए EU के SAFE प्रोग्राम के दरवाजे खुल सकते हैं।
SAFE, 150 अरब यूरो का डिफेंस फंड है, जो रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए बनाया गया है।
इससे भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री को बड़ा अंतरराष्ट्रीय मौका मिल सकता है।
भारत–EU FTA पर बातचीत की शुरुआत साल 2007 में हुई थी।
2013 में महत्वाकांक्षाओं के अंतर के चलते वार्ता रुक गई थी।
जून 2022 में बातचीत फिर शुरू हुई और अब यह निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है।
शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रोफेशनल्स की यूरोप में आवाजाही को लेकर भी चर्चा होगी।
मोबिलिटी और माइग्रेशन पर एक अहम MoU होने की संभावना है।
इससे भारतीय युवाओं और स्किल्ड वर्कर्स को नए अवसर मिल सकते हैं।
भारत और EU रूस–यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
हालांकि सभी विषयों पर दोनों की राय एक जैसी नहीं है।
फिर भी स्थिर और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था दोनों का साझा लक्ष्य है।
यूरोपीय संघ, एक ब्लॉक के तौर पर भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत–EU के बीच 136 अरब डॉलर का व्यापार हुआ।
इसमें भारत का निर्यात करीब 76 अरब डॉलर का रहा, जो मजबूत आर्थिक संबंध दिखाता है।
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